सरकार ने बुधवार को बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था की सालाना विकास दर तेजी से गिरकर 4.3% रह गई, जो पिछले 3 सालों में सबसे कम है। आधिकारिक आंकड़े उम्मीद से कम रहे और जनवरी-मार्च में अर्थव्यवस्था की मजबूत 5% की विकास दर के मुकाबले काफी नीचे रहे। ऐसा तब हुआ जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी और चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मजबूत वैश्विक मांग के कारण निर्यात में बढ़ोतरी हुई थी। इसी बीच भारत और चीन के बीच होने वाले व्यापार में भी उछाल की खबरें आई हैं।
चीन की अर्थव्यवस्था पर खास असर नहीं डाल पाया पश्चिम एशिया संकट
ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से वैश्विक महंगाई बढ़ी, लेकिन चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। कस्टम्स डेटा के अनुसार, साल की पहली छमाही में निर्यात पिछले साल के मुकाबले 17.6% और जून में 27% बढ़ा। लेकिन, घरेलू खर्च और निवेश पीछे रह गए, जिससे चीन के निर्यात-आधारित मैन्युफैक्चरिंग से मिलने वाली बढ़त सीमित हो गई।
असंतुलित होती जा रही है चीन की अर्थव्यवस्था
कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन की अर्थव्यवस्था असंतुलित होती जा रही है। सरकार और प्राइवेट सेक्टर का भारी निवेश AI, कंप्यूटर चिप्स और रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों में हो रहा है, जबकि कम वैल्यू वाली मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार पैदा करने वाले सर्विस सेक्टर जैसे अन्य क्षेत्र पिछड़ रहे हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, कंप्यूटर चिप्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे हाई-टेक प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसमें सरकार की भारी मदद का हाथ है, क्योंकि चीन के नेताओं ने एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
जरूरत से ज्यादा होती है मैन्युफैक्चरिंग वाले सामान की सप्लाई
पिछले साल चीन का ग्लोबल ट्रेड सरप्लस रिकॉर्ड $1.2 ट्रिलियन रहा। इससे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापार असंतुलन को लेकर दूसरे देशों के नीति-निर्माताओं ने शिकायतें कीं। कई लोगों ने सरकार की भारी सब्सिडी की ओर इशारा किया है; उनका कहना है कि इससे मैन्युफैक्चरिंग वाले सामान की जरूरत से ज्यादा सप्लाई होती है, जिसे बाद में विदेशों में निर्यात कर दिया जाता है।
AI और रोबोटिक्स के विस्तार से पैदा हुई चिंता
जैसा कि कई देशों में हो रहा है, चीन में भी AI और रोबोटिक्स के विस्तार से ये चिंता पैदा हुई है कि क्या कंपनियां लंबे समय तक विकास बनाए रखने के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा कर पाएंगी। चीनी परिवारों ने बड़ी खरीदारी कम कर दी है। प्रॉपर्टी मार्केट में लंबे समय से जारी मंदी और नौकरी एवं वेतन को लेकर अनिश्चितता के कारण उनके खर्च करने की इच्छा पर असर पड़ा है।
मजबूत सप्लाई और कमजोर मांग के बीच गंभीर असंतुलन
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के डिप्टी हेड माओ शेंगयोंग ने बताया कि वैश्विक स्थिति के लगातार अस्थिर और अनिश्चित होने के कारण, देश के भीतर मजबूत सप्लाई और कमजोर मांग के बीच असंतुलन गंभीर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चीन हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रहा है और बेहतर गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास” की ओर बढ़ रहा है, वो एक मजबूत घरेलू बाजार बनाने और रोजगार को स्थिर रखने के लिए समर्थन देने की दिशा में काम करेगा।
बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है चीन की अर्थव्यवस्था
BNP परिबास सिक्योरिटीज (चीन) में मल्टी-एसेट इन्वेस्टमेंट के हेड, वेई ली ने कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था एक “बड़े बदलाव” के दौर से गुजर रही है। चीन के नेताओं ने पूरे 2026 के लिए 4.5% से 5% की ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 5% से कम है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने हाल ही में चीन की सालाना ग्रोथ का अनुमान 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 4.6% कर दिया है। लेकिन उनका अनुमान है कि 2027 में चीन की अर्थव्यवस्था सिर्फ 4.1% बढ़ेगी।
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