भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ भारत का व्यापार घाटा यानी ट्रेड डेफिसिट भी तेजी से बढ़ रहा है। चीन के सीमा शुल्क विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के पहले छह महीनों में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार बढ़कर 91.72 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 23.6% ज्यादा है। हालांकि इस दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 67.1 अरब डॉलर हो गया, जिसने सरकार और उद्योग जगत की चिंता बढ़ा दी है।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच चीन का भारत को निर्यात 21.8% बढ़कर 79.41 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं भारत का चीन को निर्यात भी बढ़ा और 37.2% की वृद्धि के साथ 12.31 अरब डॉलर रहा। इसके बावजूद आयात और निर्यात के बीच बड़ा अंतर होने की वजह से व्यापार घाटा लगातार बढ़ता गया।
किन चीजों का सबसे ज्यादा होता है कारोबार?
चीन से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल और स्मार्टफोन के पार्ट्स, सेमीकंडक्टर, लिथियम-आयन बैटरी, चार्जर, कंप्यूटर, औद्योगिक मशीनें, प्लास्टिक और ऑर्गेनिक केमिकल्स शामिल हैं। वहीं भारत चीन को खनिज, पेट्रोलियम उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और समुद्री उत्पाद, दवाइयां, रत्न और आभूषण का निर्यात करता है। हाल के महीनों में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), OLED डिस्प्ले मॉड्यूल और रिफाइंड पेट्रोलियम के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारत की सबसे बड़ी चिंता बना ट्रेड डेफिसिट
व्यापार बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन भारत का आयात निर्यात से कई गुना ज्यादा होने के कारण ट्रेड डेफिसिट लगातार बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में भी भारत-चीन व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर से ज्यादा रहा था। अब 2026 के पहले छह महीनों के आंकड़े भी यही संकेत दे रहे हैं कि यह अंतर अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भारत चाहता है चीन खोले अपना बाजार
भारत लंबे समय से चीन से अपने फार्मा, आईटी और कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की मांग करता रहा है। भारतीय राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने भी हाल ही में कहा कि यदि चीन भारतीय दवाइयों और अन्य उत्पादों का आयात बढ़ाता है और भारतीय बाजार में निवेश करता है, तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।
आगे क्या रहेगा असर?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारत को व्यापार घाटा कम करना है, तो उसे चीन को ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाना होगा। साथ ही घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार काम करना होगा। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार नीति में होने वाले बदलाव इस बैलेंस को सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इनपुट- PTI


