Friday, June 12, 2026
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Monsoon 2026: ट्रैक की ऊंचाई बढ़ी, नाले में लगे फ्लोटिंग कैमरे, मानसून के लिए रेलवे का महा-प्लान तैयार


Indian Railways Monsoon Plan: मानसून के दौरान रेलवे ट्रैक पर जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पश्चिम रेलवे ने इस वर्ष व्यापक तैयारियां की हैं. पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने बताया कि हर साल बारिश के दौरान जिन स्थानों पर पानी भरने की समस्या सामने आती है, वहां विशेष उपाय किए गए हैं ताकि रेल सेवाएं प्रभावित न हों.

उन्होंने कहा कि पश्चिम रेलवे ने अपने पूरे नेटवर्क में ऐसे सभी क्रिटिकल लोकेशन की पहचान की है जहां बारिश के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न होती रही है. इन स्थानों पर समस्या के कारणों का अध्ययन कर स्थायी समाधान लागू किए गए हैं.

माटुंगा स्टेशन पर बड़ा सुधार कार्य

विनीत अभिषेक ने बताया कि माटुंगा रेलवे स्टेशन पर जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. यहां डाउन लाइन के रेल ट्रैक को लगभग साढ़े छह इंच और अप लाइन को सवा पांच इंच ऊंचा किया गया है.

इसके अलावा स्टेशन परिसर में वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे पानी का स्तर लगातार मॉनिटर किया जा सकेगा. डाउन लाइन पर बार-बार जलभराव की शिकायतें मिलने के बाद वहां ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाई गई है.

पानी निकासी के लिए बनाया नया मार्ग

रेलवे ने जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नया वाटर एक्सेस चैनल तैयार किया है, जिससे बारिश का पानी तेजी से बाहर निकल सकेगा. साथ ही पानी निकालने वाली पाइपलाइन का व्यास भी बढ़ाया गया है.

पहले जहां ड्रेनेज पाइप का व्यास लगभग 400 मिमी था, उसे बढ़ाकर 1250 मिमी कर दिया गया है. अब यह पानी दादर-धारावी नाला मार्ग से सीधे मिठी नदी तक पहुंचाया जाएगा, जिससे ट्रैक पर जलभराव की संभावना काफी कम हो जाएगी.

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250 मीटर लंबे नाले की विशेष सफाई

पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने संयुक्त रूप से 250 मीटर लंबे एक महत्वपूर्ण ड्रेनेज सेक्शन की सफाई की है. इस दौरान नाले से जमा गाद और अन्य अवरोधों को हटाया गया है.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नाले की निगरानी के लिए वहां फ्लोटिंग कैमरे भी लगाए गए हैं, जिससे जल प्रवाह और किसी भी अवरोध पर नजर रखी जा सके.

60 किलोमीटर ड्रेनेज नेटवर्क की सफाई

मानसून पूर्व तैयारियों के तहत पश्चिम रेलवे ने लगभग 60 किलोमीटर लंबे ड्रेनेज नेटवर्क की सफाई पूरी कर ली है. इसके अलावा ढाई किलोमीटर नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण भी किया गया है.

रेलवे ने जलभराव वाले क्षेत्रों में 117 हाई-कैपेसिटी पंप स्थापित किए हैं. इनमें से 6 पंप केवल माटुंगा क्षेत्र में लगाए गए हैं, ताकि भारी बारिश की स्थिति में पानी को तेजी से निकाला जा सके.

माइक्रो टनल और वृक्षों की छंटाई

रेलवे ने विभिन्न स्थानों पर 19 माइक्रो टनल तैयार की हैं, जिससे पानी की निकासी बेहतर हो सके. इसके अलावा रेलवे ट्रैक के आसपास मौजूद पेड़ों की आवश्यक अनुमति लेकर छंटाई भी की गई है, ताकि मानसून के दौरान पेड़ गिरने या शाखाएं टूटने से रेल परिचालन प्रभावित न हो.

वसई रोड क्षेत्र में भी विशेष कार्य

पश्चिम रेलवे ने वसई रोड सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी नालों की सफाई, नए ड्रेनेज चैनल निर्माण और जल निकासी क्षमता बढ़ाने के लिए कई कार्य किए हैं.

विनीत अभिषेक ने कहा कि पश्चिम रेलवे का लक्ष्य बारिश के दौरान ट्रैक पर पानी जमा होने से रोकना और यात्रियों को निर्बाध रेल सेवा उपलब्ध कराना है. इसके लिए रेलवे की टीमें लगातार निगरानी और रखरखाव का काम कर रही हैं.

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