मई 2026 में देश का GST (माल एवं सेवा कर) कलेक्शन 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। जीएसटी कलेक्शन में ये बढ़ोतरी वस्तुओं एवं सेवाओं की सप्लाई में सुधार और आयात से होने वाले टैक्स कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी के कारण हुई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में ये जानकारी सामने आई। मई, 2025 में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1.88 लाख करोड़ रुपये रहा था। घरेलू लेनदेन से मई के दौरान सेंट्रल जीएसटी (CGST) कलेक्शन 37,397 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी (SGST) 45,143 करोड़ रुपये और इंटीग्रेटेज जीएसटी (IGST) 51,990 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान, टैक्स योग्य वस्तुओं की सप्लाई में 26.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो घरेलू मांग को दर्शाती है। वहीं, सर्विस सेक्टर ये बढ़ोतरी 22.2 प्रतिशत रही, जो घरेलू खपत की मजबूती को दिखाती है।
आयात से आईजीएसटी कलेक्शन 19.1 प्रतिशत बढ़ा
आयात से आईजीएसटी कलेक्शन 19.1 प्रतिशत बढ़कर मई में 59,654 करोड़ रुपये हो गया, जो औद्योगिक क्षमता के विस्तार का संकेत है। जीएसटी ‘रिफंड’ 2.6 प्रतिशत बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया। ‘रिफंड’ समायोजित करने के बाद, मई में नेट जीएसटी रेवेन्यू 3.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पहले, अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.43 लाख करोड़ रुपये के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गया था। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल और मई) में कुल मिलाकर जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में ये 4.11 लाख करोड़ रुपये था।
चालू वित्त वर्ष में जीएसटी से 10.19 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में जीएसटी से 10.19 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। प्रोफेशनल सर्विस कंपनी डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और इनडायरेक्ट टैक्स हेड महेश जे. ने कहा कि मई में घरेलू प्रदर्शन अपेक्षाकृत नरम रहा, जिसे अप्रैल के मजबूत आधार के संदर्भ में देखना चाहिए। हालांकि, जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स रेट में हुए सुधार, रेवेन्यू पर बड़ा असर डाले बिना खपत और मांग को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग से उद्योग जगत को उम्मीद है कि कारोबार सुगमता बढ़ाने और कार्यशील पूंजी को और मुक्त करने के उपाय किए जाएंगे।


