Friday, July 10, 2026
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Ginger Turmeric Tea : मानसून में सर्दी-खांसी से रहना है दूर? रोज पिएं अदरक-हल्दी की ये गर्म चाय


अदरक-हल्दी की चाय भारतीय घरों में कई पीढ़ियों से बनाई और पी जाती रही है. यह सामान्य दूध वाली चाय से अलग होती है. इसमें चायपत्ती, दूध और चीनी की जगह ताजा अदरक, हल्दी, काली मिर्च और नींबू का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी चीजों को पानी में धीमी आंच पर उबालकर यह हर्बल चाय तैयार की जाती है. हल्दी का मिट्टी जैसा टेस्ट और अदरक का हल्का तीखापन मिलकर इसे खास टेस्ट और खुशबू देते हैं.

अदरक-हल्दी की चाय भारतीय घरों में कई पीढ़ियों से बनाई और पी जाती रही है. यह सामान्य दूध वाली चाय से अलग होती है. इसमें चायपत्ती, दूध और चीनी की जगह ताजा अदरक, हल्दी, काली मिर्च और नींबू का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी चीजों को पानी में धीमी आंच पर उबालकर यह हर्बल चाय तैयार की जाती है. हल्दी का मिट्टी जैसा टेस्ट और अदरक का हल्का तीखापन मिलकर इसे खास टेस्ट और खुशबू देते हैं.

अदरक में जिंजरोल (Gingerol) और हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) नाम के नेचुरल तत्व  पाए जाते हैं. ये दोनों अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाने जाते हैं. साथ मिलकर ये शरीर की इम्यूनिटी, पाचन, सांस लेने की समस्या और जोड़ों की सेहत को सपोर्ट करने में मदद करते हैं.

अदरक में जिंजरोल (Gingerol) और हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) नाम के नेचुरल तत्व पाए जाते हैं. ये दोनों अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाने जाते हैं. साथ मिलकर ये शरीर की इम्यूनिटी, पाचन, सांस लेने की समस्या और जोड़ों की सेहत को सपोर्ट करने में मदद करते हैं.

इस चाय में डाली जाने वाली काली मिर्च करक्यूमिन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करती है. वहीं अदरक पाचन को सपोर्ट करता है और मौसम बदलने के दौरान होने वाली मतली, पेट फूलना और गले की हल्की जलन जैसी समस्याओं में राहत देने में मददगार माना जाता है.

इस चाय में डाली जाने वाली काली मिर्च करक्यूमिन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करती है. वहीं अदरक पाचन को सपोर्ट करता है और मौसम बदलने के दौरान होने वाली मतली, पेट फूलना और गले की हल्की जलन जैसी समस्याओं में राहत देने में मददगार माना जाता है.

दूध वाली चाय में चायपत्ती, दूध और अक्सर चीनी का इस्तेमाल होता है, जबकि अदरक-हल्दी की चाय एक हर्बल ड्रिंक है. इसमें चायपत्ती नहीं डाली जाती, इसलिए यह नेचुरली कैफीन-फ्री होती है. जो लोग कैफीन कम लेना चाहते हैं, उनके लिए यह एक हल्का ऑप्शन माना जाता है.

दूध वाली चाय में चायपत्ती, दूध और अक्सर चीनी का इस्तेमाल होता है, जबकि अदरक-हल्दी की चाय एक हर्बल ड्रिंक है. इसमें चायपत्ती नहीं डाली जाती, इसलिए यह नेचुरली कैफीन-फ्री होती है. जो लोग कैफीन कम लेना चाहते हैं, उनके लिए यह एक हल्का ऑप्शन माना जाता है.

अदरक-हल्दी की चाय बनाने के लिए ताजा अदरक और ताजी हल्दी का इस्तेमाल करें. इसमें थोड़ी काली मिर्च जरूर डालें. चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है. चाहें तो इसमें ताजी तुलसी की पत्तियां भी डाल सकते हैं. नींबू का रस हमेशा चाय बनने के बाद मिलाएं, साथ ही चाय को जरूरत से ज्यादा न उबालें और हमेशा ताजा बनाकर ही पिएं.

अदरक-हल्दी की चाय बनाने के लिए ताजा अदरक और ताजी हल्दी का इस्तेमाल करें. इसमें थोड़ी काली मिर्च जरूर डालें. चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है. चाहें तो इसमें ताजी तुलसी की पत्तियां भी डाल सकते हैं. नींबू का रस हमेशा चाय बनने के बाद मिलाएं, साथ ही चाय को जरूरत से ज्यादा न उबालें और हमेशा ताजा बनाकर ही पिएं.

अदरक-हल्दी की चाय में कैलोरी बहुत कम होती है. इसके साथ ही इसमें ताजी जड़ी-बूटियों और मसालों से मिलने वाले नेचुरल पौधों के तत्व और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहते हैं. इसमें कैफीन भी नहीं होता, इसलिए इसे मानसून के दौरान बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है.

अदरक-हल्दी की चाय में कैलोरी बहुत कम होती है. इसके साथ ही इसमें ताजी जड़ी-बूटियों और मसालों से मिलने वाले नेचुरल पौधों के तत्व और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहते हैं. इसमें कैफीन भी नहीं होता, इसलिए इसे मानसून के दौरान बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है.

Published at : 10 Jul 2026 01:05 AM (IST)

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