Monday, June 29, 2026
Homeअर्थव्यवस्थाF&O ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर! SEBI ला सकता है लॉन्ग टर्म...

F&O ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर! SEBI ला सकता है लॉन्ग टर्म के कॉन्ट्रैक्ट्स, बदल जाएगा ट्रेडिंग का पूरा खेल


शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बाजार नियामक SEBI अब सिर्फ वीकली और मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि लॉन्ग-टर्म F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को भी बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से ट्रेडिंग का तरीका बदल सकता है और निवेशकों को रिस्क मैनेजमेंट के नए ऑप्शन मिल सकते हैं।

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने हाल ही में संकेत दिए थे कि भारतीय डेरिवेटिव बाजार में लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स की जरूरत है। नियामक का मानना है कि मौजूदा F&O बाजार में शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग और सट्टेबाजी ज्यादा होती है। अगर लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू होते हैं तो निवेशक अपनी लंबी अवधि की निवेश रणनीति को बेहतर तरीके से हेज कर सकेंगे।

एक्सपर्ट्स ने किया सपोर्ट, लेकिन रखीं शर्तें

मार्केट एक्सपर्ट्स ने SEBI के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। हालांकि उनका कहना है कि केवल नए कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए लिक्विडिटी बढ़ानी होगी, मार्केट मेकर्स की संख्या बढ़ानी होगी और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। तभी यह मॉडल सफल हो सकेगा।

मार्जिन नियम सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन काफी ज्यादा है, जिससे निवेशकों की लागत बढ़ जाती है। यदि SEBI मार्जिन नियमों को आसान और तर्कसंगत बनाता है, तो लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स ज्यादा आकर्षक बन सकते हैं। साथ ही सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और अन्य लेनदेन लागतों की भी समीक्षा की जरूरत बताई जा रही है।

शुरुआत इंडेक्स से हो सकती है

बाजार जानकारों का मानना है कि शुरुआत में निफ्टी, सेंसेक्स और अन्य प्रमुख इंडेक्स पर लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू किए जा सकते हैं। इन इंडेक्स में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम होता है और कीमतों में हेरफेर की संभावना भी कम रहती है। बाद में इन्हें चुनिंदा बड़े और लिक्विड शेयरों तक बढ़ाया जा सकता है।

क्या बदल जाएगा ट्रेडिंग का तरीका?

लॉन्ग-टर्म F&O कॉन्ट्रैक्ट्स वीकली एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स जितने लोकप्रिय शायद न बनें, लेकिन ये लंबी अवधि के निवेशकों, म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड और बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए जोखिम कम करने का एक मजबूत विकल्प साबित हो सकते हैं। यदि SEBI इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो भारतीय डेरिवेटिव बाजार में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है।

यह भी पढ़ें- SEBI ने निवेशकों के लिए जारी की चेतावनी, आपने भी की ये गलती तो पैसा डूबने में नहीं लगेगा समय





Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments