केरल का मुख्यमंत्री कौन (Who Becomes Kerala CM) बनेगा, यह सवाल राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के मन में रविवार को भी बना रहा, क्योंकि कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर अनिश्चितता बरकरार है. पार्टी आलाकमान ने इस संबंध में अब तक अपना फैसला नहीं सुनाया है. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस मामले पर मंथन कर रहे हैं और जल्द ही नाम की घोषणा होने की संभावना है.
तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी मौजूदा बहस ने दक्षिणी राज्य में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) की चुनावी जीत को प्रभावित नहीं किया है.
कांग्रेस नेतृत्व ने केरल के अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर शनिवार को पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा की. पार्टी अध्यक्ष के आवास ‘10 राजाजी मार्ग’ पर हुई बैठक में खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, वी डी सतीशन तथा कांग्रेस के दोनों पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक एवं प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी शामिल हुए.
वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. चेन्निथला ने बैठक के बाद कहा था, ‘‘सभी ने अपने विचार व्यक्त किए और राहुल जी ने उन्हें धैर्यपूर्वक सुना. मुख्यमंत्री के संबंध में अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिया जाएगा और जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह सभी को स्वीकार्य होगा.’’
दीपा दासमुंशी ने कहा था, ‘‘बहुत जल्द आलाकमान द्वारा अंतिम निर्णय किया जाएगा. सभी विधायकों ने एक लाइन के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें आलाकमान को अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है.’’ सतीशन ने कहा था कि सभी कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत के कारण कांग्रेस ने केरल विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल की है. हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान और यहां तक कि बैनर भी लगाए गए हैं, जिससे पार्टी में मतभेद खुलकर सामने आए हैं.
सतीशन ने कहा था, ‘‘हम सभी एक साथ निवेदन करते हैं कि कृपया हममें से किसी के लिए भी इस तरह के प्रदर्शन और अभियान न चलाएं. इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं, यूडीएफ कार्यकर्ताओं और उन असंख्य लोगों को ठेस पहुंचेगी, जिन्होंने हमें वोट दिया है.’’ उनके विचारों का समर्थन करते हुए वेणुगोपाल ने कहा था कि जनता ने पार्टी को भारी जीत दिलाई है और वे एक ऐसी यूडीएफ सरकार चाहते हैं, जो उनके लिए काम करे.
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अधिकतर विधायक वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त करने के पक्ष में हैं, जबकि जनता की पसंद सतीशन हैं. चेन्निथला की वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए उनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है. वेणुगोपाल और सतीशन दोनों के समर्थकों ने दिल्ली और केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में अपने नेताओं के पोस्टर और बैनर लगाए हैं. यूडीएफ ने नौ अप्रैल को हुए राज्य विधानसभा चुनाव में 140 सीट में से 102 सीट हासिल कीं। गठबंधन की प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने 63 सीट पर जीत दर्ज की है.


