दुनियाभर में हवाई सफर महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल के चलते कई बड़ी एयरलाइंस अब उड़ानें घटाने और कुछ रूट बंद करने को मजबूर हो गई हैं। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है, जहां टिकट महंगे हो रहे हैं और कई शहरों के बीच कनेक्टिविटी कमजोर पड़ने लगी है।
ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और तेल सप्लाई में बाधा के कारण जेट फ्यूल की कीमतें आसमान छू रही हैं। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसका असर अब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप, अमेरिका और एशिया तक फैल चुका है।
एयरलाइंस ने घटाईं उड़ानें
कई बड़ी एयरलाइंस जैसे KLM, यूनाइटेड एयरलाइंस, लुफ्थांसा और कैथे पैसिफिक ने अपने फ्लाइट शेड्यूल में कटौती शुरू कर दी है। कुछ कंपनियों ने पुराने और ज्यादा फ्यूल खर्च करने वाले विमानों को भी ग्राउंड कर दिया है। डेटा के मुताबिक, मई महीने में वैश्विक उड़ानों की क्षमता करीब 3% तक घटा दी गई है और आगे और कटौती की आशंका जताई जा रही है।
यात्रियों पर सीधा असर
उड़ानों में कटौती का मतलब है कम सीटें और ज्यादा किराया। कई एयरलाइंस लंबी दूरी की उड़ानों पर 400 डॉलर तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज भी जोड़ रही हैं। इससे यात्रियों का बजट बिगड़ रहा है और ट्रैवल प्लानिंग मुश्किल हो रही है।
फ्यूल की कमी भी बनी चिंता
सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि जेट फ्यूल की उपलब्धता भी चिंता का कारण बन रही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि यूरोप में जेट फ्यूल का स्टॉक सीमित समय के लिए ही बचा है। अगर स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो उड़ानों पर और बड़ा असर पड़ सकता है।
ग्लोबल ट्रैवल सीजन पर खतरा
आने वाले समर ट्रैवल सीजन को एयरलाइंस के लिए सबसे अहम माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात इस सीजन को कमजोर कर सकते हैं। कई कम लोकप्रिय रूट पहले ही बंद किए जा चुके हैं, जिससे छोटे शहरों की कनेक्टिविटी पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेट फ्यूल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस और ज्यादा कटौती कर सकती हैं। इससे ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ेगा और यात्रियों को आने वाले महीनों में और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


