Monday, May 18, 2026
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‘राजनीतिक मतभेद अपनी जगह है लेकिन…’, RGPV से राजीव गांधी का नाम हटाने पर दिग्विजय सिंह का बयान


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  • RGPV का नाम बदलने पर कांग्रेस सरकार पर भड़की.
  • दिग्विजय सिंह ने राजीव गांधी का नाम हटाने का विरोध किया.
  • तकनीकी शिक्षा की नींव राजीव गांधी ने रखी थी.
  • विश्वविद्यालय को भोपाल, जबलपुर, उज्जैन में बांटा जाएगा.

मध्य प्रदेश सरका राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का नाम बदलकर इसे तीन हिस्सों में बांटने जा रही है. इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस बीजेपी सरकार पर भड़क गई है और उसपर राज्य के इतिहास को मिटाने का आरोप लगाया है. पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अब इसपर प्रतिक्रिया दी है और कहा कि इस तरह  पूर्व प्रधानमंत्री और तकनीकी क्रांति के सूत्रधार रहे राजीव गांधी का नाम हटाना उचित नहीं  है.

दिग्विजय सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री और तकनीकी क्रांति के सूत्रधार रहे राजीव गांधी जी के नाम को हटाना उचित नहीं है. मैं मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह करता हूं कि RGPV का नाम यथावत रखा जाए. इतिहास और योगदान को मिटाने की नहीं, सम्मान देने की आवश्यकता है.’ 

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दिग्विजय सिंह ने कहा नाम परिवर्तित करना सही नहीं

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आगे लिखा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भारत में तकनीकी और आधुनिक शिक्षा की नींव मजबूत करने का ऐतिहासिक कार्य किया. मध्य प्रदेश में हमारी सरकार ने वर्ष 1998 में उनके योगदान के सम्मान में ‘राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV)’ की स्थापना की, जो आज प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है.  ‘राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV)’ का नाम परिवर्तित करना उचित नहीं है.’ 

नेता प्रतिपक्ष ने भी जताई थी आपत्ती

इससे पहले राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इसपर आपत्ति जताई थी और कहा था कि बीजेपी इतिहास को मिटा सकती है, लेकिन देश राजीव गांधी के योगदान को कभी नहीं भूल सकता है. उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से न वो बेहतर होगी, न युवाओं को नौकरी मिलेगी, न शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी.  बता दें कि देशभर के लाखों स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग समेत अन्य विषयों की डिग्री देने वाले RGPV  का नाम बदलने पर चर्चा तो है, लेकिन नए नाम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इसे तीन हिस्सों- भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में बांटा जाएगा ताकि इंजीनियरिंग कॉलेजों का प्रबंधन और बेहतर हो सके. 

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