देश में रेलवे नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने ₹24,815 करोड़ की लागत वाली दो बड़ी रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में करीब 601 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिससे यात्रियों और व्यापार दोनों को बड़ा फायदा मिलेगा।
601 किलोमीटर तक फैलेगा रेल नेटवर्क
सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करना है। इसके बाद भारतीय रेलवे का नेटवर्क और मजबूत होगा और ट्रेनों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी। ये प्रोजेक्ट ‘पीएम गति शक्ति’ योजना के तहत लाए गए हैं, जिसका मकसद तेज और बेहतर कनेक्टिविटी देना है।
गाजियाबाद-सीतापुर प्रोजेक्ट से यूपी को बड़ा फायदा
पहली परियोजना गाजियाबाद से सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की है। इसकी कुल लंबाई 403 किलोमीटर है और इस पर करीब ₹14,926 करोड़ खर्च होंगे। यह लाइन गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर जैसे अहम शहरों को जोड़ेगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस प्रोजेक्ट से दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। साथ ही भीड़भाड़ कम करने के लिए नए स्टेशन भी बनाए जाएंगे।
आंध्र प्रदेश में पोर्ट कनेक्टिविटी होगी मजबूत
दूसरी परियोजना राजमुंदरी (निदादावोलु) से विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तक तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की है। इसकी लंबाई 198 किलोमीटर है और लागत ₹9,889 करोड़ है।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा फायदा
इस प्रोजेक्ट से विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपट्टनम और काकीनाडा जैसे बड़े बंदरगाहों तक माल पहुंचाना आसान और सस्ता होगा। इससे व्यापार को तेजी मिलेगी और उद्योगों को भी फायदा होगा।
क्या होंगे बड़े फायदे?
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे लाइनों पर भीड़भाड़ कम होगी और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, जिससे आम लोगों तक सामान सस्ता पहुंच सकता है। इसके अलावा निर्माण कार्यों के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। पर्यावरण के लिहाज से भी ये प्रोजेक्ट फायदेमंद हैं। सरकार का कहना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी, जो करोड़ों पेड़ लगाने के बराबर असर डाल सकती है।


