ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने शुक्रवार को सीजफायर रहने तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोल देने का ऐलान कर दिया। यह फैसला पूरे एशियाई देशों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुल जाने से भारत को जबरदस्त राहत मिलने वाली है। भारत के सामने खड़ी ऊर्जा आपूर्ति की चुनौती खत्म हो जाएगी। सप्लाई चेन सुधरने से एलएनजी, एलपीजी, कच्चा तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी, जिससे देशभर में जरूरतमंदों तक पेट्रोलियम उत्पाद आसानी से पूर्व की कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के ये बड़े फायदे होंगे
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देश की बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से पूरी होती हैं। भारत अपनी कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) आयात का लगभग 45 से 50 प्रतिशत और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का 50 प्रतिशत से अधिक इसी रास्ते से आयात करता है। प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल तेल की आपूर्ति भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से होती है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुल जाने के बाद पेट्रोलियम पदार्थों का आयात आसान होगा।
- भारत अपनी 85 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है, जिसमें खाड़ी देशों-सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत हिस्सेदारी सबसे अधिक है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने से बाधाएं खत्म हो जाएंगी और भारत की ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सकेगी।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुल जाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अब और गिरावट आएगी। इससे भारत के बढ़ते व्यापार घाटे में राहत मिलेगी। महंगाई दर पर दबाव आने वाले दिनों में घटेगा। विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ खत्म हो जाएगा। शिपिंग बीमा और माल ढुलाई लागत में कमी आएगी।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता साफ होने से भारत से अन्य वस्तुओं का निर्यात भी आसान हो जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। उनका माल समय पर सही लागत के साथ दुनिया के अन्य देशों तक पहुंच सकेगा।
- भारत को पेट्रोलियम के अलावा अन्य जरूरी सामानों के आयात करने में आसानी होगी। जहाज समय पर भारत पहुंच सकेंगे। इससे इन वस्तुओं की कीमत भारत में अपने पूर्व स्तर पर आ सकेंगी।


