Petrol Diesel Price Hike: यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से क्रूड ऑइल की कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है. हालांकि भारत ने इसका असर फिलहाल जनता पर ज्यादा नहीं पड़ने दिया है. इसी बीच अब IMF (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) के एशिया पैसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कृष्ण श्रीनिवासन ने कहा कै कि ऐसा ही चलता रहा तो भारत की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा सकती है. ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाने पर ध्यान देना होगा.
क्या बोले श्रीनिवासन?
दरअसल कृष्णा श्रीनिवासन 5 मई को नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद भी पेट्रोल- डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो इसका असर पूरी तरह से बाजार पर पड़ेगा. उन्होंने ये भी बताया है कि यदि उर्वरक की कीमतों को कम कर दिया जाए तो लोगों की जेब पर असर कम पड़ेगा.
ये भी पढ़ें: होम लोन की EMI 25000 है, बैंक बैलेंस रह गया 20 हजार; अब क्या होगा, क्या लगेगा जुर्माना?
कितनी हुई क्रूड ऑइल की कीमतें?
ईरान और यूएस के बीच चल रहे तनाव की वजह से क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसी की वजह से क्रूड ऑइल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रही हैं, तो वहीं 30 अप्रैल तक भारत का क्रूड बास्केट करीब 118.70 प्रति बैरल के हिसाब से चल रहा था.
मिडिल- ईस्ट तनाव से सप्लाई प्रभावित
बता दें कि मिडिल ईस्ट में तनाव फरवरी 2026 से चल रहा है. जिसकी वजह से ना केवल पेट्रोल- डीजल बल्कि कमर्शियल और घरेलू गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं देशभर में लोगों को इसकी कमी से भी जूझना पड़ रहा है. ऐसे में IMF की तरफ से आया ये ताजा बयान लोगों की नींदें उड़ाने वाला है.
ये भी पढ़ें: Crude Oil Reserve: खत्म होने की कगार पर कच्चा तेल, जानें बचे स्टॉक से कितने दिन की डिमांड हो सकती है पूरी?


