Monday, June 8, 2026
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ट्रम्प ने भारत में बाइक चलाने का AI-वीडियो शेयर किया:शेर की सवारी करते दिखे, चांद पर झंडा भी लगाया




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर किया। करीब एक मिनट के इस वीडियो में ट्रम्प कभी भारत की सड़कों पर बाइक चलाते दिखते हैं, तो कभी शेर की सवारी करते नजर आते हैं। वीडियो में ट्रम्प के कई अलग-अलग अवतार दिखाए गए हैं। उन्हें रेगिस्तान में ऊंट पर बैठे, पैराग्लाइडिंग करते और स्पेससूट पहनकर चांद पर अमेरिकी झंडा लगाते हुए भी दिखाया गया है। इतना ही नहीं, उनका चेहरा पिज्जा, बस, होर्डिंग, माउंट रशमोर और नॉर्दर्न लाइट्स पर भी नजर आता है। वीडियो के बैकग्राउंड में एक गाना चलता है, जिसके बोल ट्रम्प की तारीफ पर केंद्रित हैं। इसमें बार-बार कहा जाता है कि दुनिया भर के लोग ट्रम्प को पसंद करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। वीडियो में भारत से लेकर चीन तक का जिक्र वीडियो के गाने में दावा किया गया है कि मेक्सिको, मिडिल ईस्ट, चीन और भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में लोग ट्रम्प को पसंद करते हैं। महज एक मिनट लंबे वीडियो में ‘ट्रम्प’ शब्द 45 बार और ‘डोनाल्ड’ नाम 29 बार सुनाई देता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘एवरीबडी लव्स डोनाल्ड ट्रम्प’ नाम का यह गाना ट्रुथ सोशल पर ‘ac132’ नाम के यूजर ने बनाया था। वीडियो के आखिर में इसका क्रेडिट एंथनी कॉन्स्टैंटिनो को दिया गया है, जो न्यूयॉर्क से ट्रम्प समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। ट्रम्प के वीडियो शेयर करने के बाद कॉन्स्टैंटिनो ने कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि राष्ट्रपति ने उनके गाने को अपनी प्रोफाइल पर पोस्ट किया। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे मजेदार बताया, जबकि कई लोगों ने इसे ट्रम्प की आत्म-प्रचार वाली पोस्ट कहा। एक यूजर ने लिखा कि वीडियो में ट्रम्प किसी कॉमिक बुक के सुपरहीरो जैसे लग रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि राजनीतिक नेताओं के AI कंटेंट और प्रचार के बीच की रेखा लगातार धुंधली होती जा रही है। ट्रम्प पहले भी शेयर कर चुके हैं AI तस्वीरें यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने AI-जनरेटेड कंटेंट शेयर किया हो। हाल के महीनों में उन्होंने कई ऐसी पोस्ट की हैं, जिनमें खुद को अलग-अलग किरदारों और भूमिकाओं में दिखाया गया। कुछ दिन पहले उन्होंने खुद को जेम्स बॉन्ड के अंदाज में ‘ट्रम्प 007’ कैप्शन के साथ दिखाया था। इससे पहले वह खुद को ‘ग्रेटेस्ट अट्रैक्शन’ बताते हुए भी तस्वीर शेयर कर चुके हैं। अप्रैल में ट्रम्प ने एक AI-जनरेटेड फोटो पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने खुद को जीसस के रूप में दिखाया गया था। उस पोस्ट को लेकर काफी विवाद हुआ था। बाद में पोस्ट हटा ली गई, लेकिन ट्रम्प ने माफी नहीं मांगी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें लगा था कि तस्वीर में वह डॉक्टर की तरह दिख रहे हैं। ट्रम्प पहले भी कई बार कह चुके हैं कि वह पारंपरिक मीडिया से ज्यादा सोशल मीडिया को अपनी बात रखने का अहम जरिया मानते हैं। इसी वजह से ट्रुथ सोशल पर उनकी लगभग हर पोस्ट कुछ ही देर में राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का हिस्सा बन जाती है। ईरान युद्ध से जुड़ी AI तस्वीरें भी शेयर कीं ईरान के साथ बढ़े तनाव के दौरान भी ट्रम्प ने कई AI-जनरेटेड तस्वीरें पोस्ट की थीं। इनमें कुछ तस्वीरों में ईरानी नौसेना को तबाह हालत में दिखाया गया था, जबकि दूसरी तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य ताकत को बेहद आक्रामक अंदाज में पेश किया गया था। इन तस्वीरों के जरिए ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की सेना कमजोर पड़ चुकी है और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक इलाके में अमेरिका बढ़त बना रहा है। हालांकि इन तस्वीरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं थी और इन्हें AI से तैयार किया गया विजुअल कंटेंट माना गया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा और डर पैदा करने वाला कंटेंट बताया, जबकि ट्रम्प समर्थकों ने इसे उनकी मजबूत नेतृत्व वाली छवि से जोड़कर देखा। एक्सपर्ट्स बोले- डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट बनाने की कोशिश राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रम्प AI का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपनी डिजिटल ब्रांडिंग मजबूत करने के लिए भी कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स इसे “डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट” बनाने की कोशिश मानते हैं, जिसमें नेता को असाधारण और सर्वशक्तिमान दिखाया जाता है। यानी सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए किसी व्यक्ति (जैसे- इन्फ्लुएंसर, नेता या सेलिब्रिटी) को एक निर्दोष, अलौकिक या ईश्वर जैसी छवि में पेश किया जाता है, और प्रशंसक बिना किसी तर्क के उन्हें फोलो करते हैं। उनके मुताबिक, मीम्स, वायरल वीडियो और AI विजुअल्स के जरिए ट्रम्प लगातार सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बने रहते हैं। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह का कंटेंट लोगों के लिए वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क करना और मुश्किल बना सकता है, जिससे गलत नैरेटिव और भ्रम फैलने का खतरा बढ़ता है।



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