Friday, August 21, 2026
Homeव्यापारअब तेल और गैस खरीदने में ज्यादा पैसे खर्च होंगे, वॉर से...

अब तेल और गैस खरीदने में ज्यादा पैसे खर्च होंगे, वॉर से बढ़ा भारत का बिल


Oil And Gas Update: पश्चिम एशिया में चल रही जंग का असर अब भारत के तेल और गैस के खर्च पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी के बीच भारत का नेट ऑयल और गैस इंपोर्ट बिल अप्रैल-जुलाई तक में 43.4 फीसदी बढ़ गया है. पिछले साल इन्हीं महीनों में भारत का यही खर्च 40.3 अरब डॉलर था, जो इस साल बढ़कर 57.8 अरब डॉलर पहुंच गया है.

यानी भारत को अपनी जरूरत का तेल और गैस खरीदने के लिए इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 17.5 अरब डॉलर ज्यादा खर्च करने पड़े हैं.

क्यों बढ़ा भारत का खर्च?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है. देश अपनी कुल क्रूड ऑयल जरूरत का करीब 88 फीसदी आयात करता है. ऐसे में जब दुनिया के बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है.

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और हॉर्मुज स्ट्रेट के आसपास सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आई है. भारत के लिए ये चिंता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उसके कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी के आयात का ज्यादातर हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आता है.

सस्ता नहीं अब महंगा ही होगा पेट्रोल-डीजल! कारण समझ लें

कच्चे तेल का बिल कितना बढ़ा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत ने करीब 81.9 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया है. आयात हुए तेल में पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. लेकिन कीमत देखें तो तस्वीर बिल्कुल अलग है.

कच्चे तेल के आयात पर भारत का खर्च 40.5 अरब डॉलर से बढ़कर सीधा 63.4 अरब डॉलर हो गया है. यानी पैसे में करीब 56.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे साफ है कि भारत का खर्च ज्यादा तेल खरीदने की वजह से नहीं, बल्कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण ज्यादा बढ़ा है.

LNG खरीद पर बढ़ा खर्च?
नेचुरल गैस के मामले में भी भारत का खर्च बढ़ा ही है. अप्रैल-जुलाई के दौरान एलएनजी का आयात 11,269 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर से बढ़कर 11,867 एमएससीएम हो गया. इसकी कीमत में भारत का खर्च 4.5 अरब डॉलर से बढ़कर 5.6 अरब डॉलर पहुंच गया, यानी करीब 24.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

रक्षाबंधन और लॉन्ग वीकेंड, होटल और फ्लाइट टिकट हुए महंगे

किसकी जेब होगी ढीली?
भारत के इंपोर्ट बिल में ऊर्जा सबसे ज्यादा पैसे लेता है. अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो भारत के लिए तेल और गैस खरीदना और महंगा हो सकता है.

इसका असर सिर्फ सरकार के खजाने पर नहीं पड़ेगा. महंगा कच्चा तेल रुपये की कीमत और महंगाई पर भी दबाव बढ़ा सकता है. 



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments