रविवार (19 जुलाई) को टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी ने बयान जारी किया है. उनका बयान बागी सांसदों को ओम बिरला की तरफ से दी गई, सदन में अलग से बैठने की मंजूरी के खिलाफ आया है.
उन्होंने कहा कि 20 बागी सांसदों को अलग सीट देने का फैसला उम्मीद के मुताबिक नहीं था. स्पीकर के पास बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं पहले से लंबित हैं. इन पर फैसले लेने से पहले कोई कार्रवाई नहीं की गई.
ANI के मुताबिक, बनर्जी ने कहा, ‘हमने स्पीकर के सामने दल-बदल के आधार पर अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाएं पहले ही दायर कर दी हैं. ऐसे में उन 20 याचिकाओं पर किसी तरह का फैसले किए बिना स्पीकर की तरफ से उन्हें (बागी सांसद) मान्यता देना उम्मीद के मुताबिक नहीं था.’
सर्वदलीय बैठक में दिखा बागी सांसदों का विरोध
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने टीएमसी के बागी नेताओं सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार को सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का आमंत्रण दिया. इसके विरोध में विपक्षी नेताओं ने बैठक शुरू होने के तुरंत बाद बाहर निकलकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले का विरोध किया है. आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आप, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना समेत पूरे विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया है.
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इस विरोध के पीछे तर्क है कि एनसीपीआई एक गैर मान्यता प्राप्त पार्टी है, उसे टेबल ऑफिस की तरफ से दी गई लिस्ट में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सदस्यों के साथ दिखाया गया है. इन तथाकथित बागी सांसदों के विलय को स्पीकर ने अभी मंजूरी नहीं दी है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि सभी विपक्षी दलों ने सर्वदलीय बैठक से कुछ मिनटों के लिए वॉकआउट किया है. यह सरकार के उस फैसले के विरोध में था, जिसमें एनसीपीआई को आमंत्रण दिया गया है. 20 जुलाई यानी मॉनसून सत्र की शुरुआत होने जा रही है. ऐसे में विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के मूड में है. इसके अलावा परिसीमन बिल को फिर से पटल पर रखेगी. यह एक संशोधन बिल है.
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