भारतीय शेयर बाजार में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बाजार नियामक सेबी (SEBI) कैश मार्केट और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट के नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। मुंबई में आयोजित ईटी नाउ मार्केट्स समिट 2026 में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बाजार को और मजबूत, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए एक रोडमैप पेश किया। सेबी का मानना है कि इन सुधारों से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी, जोखिम कम होगा और छोटे निवेशकों को भी बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
F&O में बढ़ेगा लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर जोर
सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक का मुख्य फोकस इक्विटी सेगमेंट में लॉन्ग टर्म F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देना है। वर्तमान में अधिकतर ट्रेडर्स शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग करते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और जोखिम बढ़ जाता है। लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स आने से निवेशकों को लंबे समय तक अपनी पोजीशन को हेज करने का मौका मिलेगा। इससे बाजार में स्थिरता बढ़ेगी और निवेशकों के लिए रिस्क मैनेजमेंट आसान होगा।
शॉर्ट सेलिंग और SLB नियमों की होगी समीक्षा
सेबी सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) और शॉर्ट सेलिंग से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। अगर कैश मार्केट और F&O मार्केट के बीच बेहतर तालमेल बनता है, तो शेयरों की खरीद-बिक्री करना आसान हो जाएगा। इससे निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी और उनका बाजार पर भरोसा भी बढ़ेगा।
RBI के साथ मिलकर नए प्रोडक्ट्स पर काम
सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मिलकर बॉन्ड मार्केट से जुड़े नए डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं। यदि ये योजनाएं लागू होती हैं तो निवेशकों को निवेश औररिस्क मैनेजमेंट के लिए नए ऑप्शन मिल सकते हैं।
स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा फायदा
सेबी अपने इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) के नियमों में भी बदलाव पर विचार कर रहा है। इससे AI, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, बायोटेक, डिफेंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों को शेयर बाजार से कैपिटल जुटाने में आसानी होगी। इस कदम से भारत के उभरते हुए स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।
डीलिस्टिंग और LODR नियम भी होंगे आसान
सेबी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए लागू नियमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के मुताबिक अपडेट करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, किसी कंपनी को शेयर बाजार से हटाने (डीलिस्टिंग) की प्रक्रिया को भी आसान और तेज बनाया जाएगा।


