रोम2 घंटे पहले
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पीएम मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने बुधवार को रोम में जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान दौरान मेलोनी ने हिंदी में कहा कि ‘परिश्रम ही सफलता की कुंजी है’।
मेलोनी ने कहा कि भारत में एक शब्द बहुत खास है ‘परिश्रम’, जिसका मतलब है मेहनत, लगातार प्रयास और समर्पण। यह शब्द भारत में अक्सर इस्तेमाल किया जाता है।
पीएम मोदी ने बताया कि रोम को दुनिया में ‘इटरनल सिटी’ (कभी न खत्म होने वाला शहर) कहा जाता है। भारत में मेरी लोकसभा सीट काशी को भी इसी तरह जाना जाता है। जब दो सभ्यताएं मिलती हैं, तो बातचीत सिर्फ एजेंडे तक सीमित नहीं रहती।
पीएम मोदी को रोम स्थित फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द यूनाइटेड नेशंस (FAO) डिपार्टमेंट ने एग्रीकोला मेडल से सम्मानित किया। यह सम्मान FAO के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने दिया।

पीएम मोदी को रोम में UN के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने एग्रीकोला मेडल दिया।
मोदी ने धरती को मां और किसान को धरती पुत्र कहा
यह पुरस्कार पीएम मोदी को भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और ग्रामीण विकास के लिए किए गए महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दिया गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और कृषि वैज्ञानिकों का सम्मान है। उन्होंने यह मेडल देश के किसानों को समर्पित किया।
मोदी ने कहा कि भारत में खेती सिर्फ काम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। यहां धरती को मां और किसान को धरती पुत्र कहा जाता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें
- भारत और इटली के रिश्ते अब और मजबूत होंगे। दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने का फैसला किया है।
- इटली डिजाइन और तकनीक के लिए मशहूर है, जबकि भारत अपनी प्रतिभा और सस्ते इनोवेशन के लिए जाना जाता है। दोनों देश मिलकर दुनिया के लिए काम करेंगे।
- भारत और इटली के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और इसे 20 अरब यूरो (2.24 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचाने का टारगेट रखा है। भारत में 400 से ज्यादा इतालवी कंपनियां काम कर रही हैं।
- तकनीक और इनोवेशन भारत-इटली साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं। दोनों देश AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और स्पेस जैसे क्षेत्रों में साथ काम करेंगे।
- भारत और इटली दोनों मानते हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा है। आतंक की फंडिंग रोकने के लिए दोनों देशों की साझा पहल दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मेलोनी के भाषण की 5 बड़ी बातें…
- भारत और इटली के रिश्ते अब अपनी पूरी क्षमता हासिल करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। रिश्ते मजबूत हुए हैं और अब सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सही समय है।
- हमने भारत और इटली के रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक पहुंचाने का फैसला लिया है। मेरी 3.5 साल में पीएम मोदी से सात मुलाकातों ने दोनों देशों को और करीब लाया।
- हमने 2029 तक भारत और इटली के बीच व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का टारगेट रखा है। हमने नई दिल्ली में इनोवेशन सेंटर बनाने का फैसला किया है।
- भारत और इटली इस समय 2025-2029 की नई साझेदारी योजना पर साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में करीब 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
- दोनों देशों के बीच एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, स्पेस, डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, एग्रीकल्चर, समुद्री परिवहन, पर्यटन और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत की जाएगी।
भारत-इटली के बीच IMEC कॉरिडोर पर फोकस
मिलोनी ने कहा कि भारत और इटली मिलकर IMEC यानी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत, मिडिल-ईस्ट और यूरोप को जोड़ने वाला बड़ा आर्थिक कॉरिडोर है।
इस परियोजना की शुरुआत 2023 में हुई थी। इसके लिए भारत, यूरोपीय संघ, अमेरिका, सऊदी अरब, UAE, फ्रांस, जर्मनी और इटली समेत कई देशों ने एक समझौता साइन किया था।
IMEC के तहत रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग नेटवर्क, ऊर्जा कनेक्टिविटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा जाएगा।
इस कॉरिडोर को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे भारत और यूरोप के बीच सामान की आवाजाही तेज होगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।
यह प्रोजेक्ट सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत-इटली के लिए IMEC क्यों अहम?
- IMEC को भारत और इटली दोनों अपने लंबे समय के रणनीतिक और आर्थिक हितों से जोड़कर देख रहे हैं। भारत के लिए यह प्रोजेक्ट यूरोप तक तेज और सस्ता व्यापार मार्ग खोल सकता है, जबकि इटली खुद को यूरोप के बड़े लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करना चाहता है।
- अभी भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में ज्यादातर समुद्री रास्ते और स्वेज नहर पर निर्भरता रहती है। IMEC बनने के बाद भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप के बीच मल्टी-मोडल नेटवर्क तैयार होगा, जिससे ट्रांसपोर्ट टाइम और लागत दोनों घट सकती हैं।
- इटली यूरोप में मेडिटेरेनियन क्षेत्र का बड़ा गेटवे माना जाता है। ऐसे में IMEC के जरिए इटली एशिया-यूरोप सप्लाई चेन का अहम केंद्र बन सकता है। इससे वहां के बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर को फायदा मिलने की उम्मीद है।
- भारत इस प्रोजेक्ट को सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक नजरिये से भी देख रहा है। इसे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन में चीन पर निर्भरता कम हो सके।
- ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा कारण है। IMEC के तहत बिजली, ग्रीन हाइड्रोजन और डिजिटल कनेक्टिविटी नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इससे भारत को यूरोप और खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
- भारत और इटली के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, फार्मा और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ा है। ऐसे में IMEC को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को अगले स्तर पर ले जाने वाले प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है।
स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को समझिए
भारत और इटली ने अपने रिश्तों को अब ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया है। इसका मतलब है कि दोनों देश अब रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में पहले से ज्यादा मिलकर काम करेंगे। इससे पहले दोनों देशों ने 2 मार्च 2023 को आपसी रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया था।
स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप दो देशों के बीच बहुत मजबूत और भरोसेमंद रिश्तों को कहा जाता है। इसमें दोनों देश लंबे समय तक साथ काम करने की योजना बनाते हैं और बड़े मुद्दों पर एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।
भारत पहले भी रूस, जापान, फ्रांस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बना चुका है। अब इटली भी इस खास लिस्ट में शामिल हो गया है।


मेलोनी और मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की
पीएम मोदी ने बुधवार को रोम में मेलोनी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। यह बैठक मोदी के पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण का हिस्सा है।
बैठक से पहले मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली के रिश्ते अब “निर्णायक दौर” में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध दोस्ती से आगे बढ़कर विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं, जो लोकतंत्र, आजादी और साझा भविष्य की सोच पर आधारित है।
बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी भी मौजूद रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, संस्कृति, एआई, स्पेस, क्रिटिकल मिनरल्स और परमाणु ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर भी विचार साझा किए।

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