Saturday, August 29, 2026
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Nepal-Tibet Border Flood | Missing Indians Rescue Operation Update


01:41 PM28 अगस्त 2026

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एक लहर और सबकुछ खत्म, तीनों पीड़ितों की कहानी

1. ‘वे सब मर गए… और मैं बच गया’

45 साल के दावा लामा की आंखों के सामने कुछ ही मिनटों में उनका पूरा परिवार उजड़ गया। बुधवार सुबह करीब 9 बजे उन्होंने तेज आवाज सुनी और हल्की हवा महसूस की। इसके तुरंत बाद कीचड़ और पानी की एक विशाल लहर तिमुरे गांव में उनके घर से टकराई।

बाढ़ अपने साथ उनका घर, सामान और उनकी पत्नी को बहा ले गई। उनकी 7 और 8 साल की दोनों बेटियां भी लापता हैं।

रोते हुए लामा ने कहा, ‘वे सब मर गए और मैं बच गया। मैं कब तक उनके लौटने की उम्मीद करता रहूंगा, मुझे नहीं पता।’

2. ‘कुछ सेकंड में इमारतें समा गईं’

स्याब्रुबेसी में तैनात 41 साल के पुलिस अधिकारी राजन खत्री को सुबह करीब 9:10 बजे फोन पर बाढ़ की चेतावनी मिली। लेकिन फोन रखते ही तेज लहरें पुलिस स्टेशन में घुस गईं।

पानी के बहाव ने उन्हें इमारत से बाहर फेंक दिया और वे बेहोश हो गए। होश आया तो चारों तरफ सिर्फ मलबा था।

खत्री ने बताया, ‘यह सिर्फ पानी नहीं था। इसमें बड़े-बड़े पत्थर, रेत और गाढ़ा कीचड़ था। कुछ ही सेकंड में कई मीटर ऊंची इमारतें भी उसमें समा गईं।’ पुलिस स्टेशन के सात कर्मचारियों में सिर्फ तीन जिंदा बचे हैं, बाकी लापता हैं।

राजन खत्री

राजन खत्री

3. ‘आंखों के सामने सब बह गया’

17 साल की स्मृति ओझा स्कूल जाने की तैयारी कर रही थीं, तभी उन्हें तेज झटके महसूस हुए। बाहर आते ही सामने बाढ़ की विशाल लहरें थीं।

उन्होंने कहा, ‘हम समय पर घर से निकल गए, लेकिन कुछ भी नहीं बचा सके। मेरी आंखों के सामने सबकुछ बह गया। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा।’

स्मृति का परिवार सुरक्षित है, लेकिन उनके चार रिश्तेदार अब भी लापता हैं।

स्मृति ओझा

स्मृति ओझा



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