सूक्ष्म, लघु एवं मझोला उद्यम मंत्रालय पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच MSME की मदद के लिए ECLGS जैसी कर्ज गारंटी योजना की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इसके लिए, मंत्रालय वित्तीय सेवा विभाग के संपर्क में है। एक सीनियर अधिकारी ने बुधवार को ये जानकारी दी। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (MSME) के लिए कर्ज गारंटी योजना पर विचार किए जाने के संबंध में एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रजनीश ने कहा, ”हम आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना (ECLGS) जैसी व्यवस्था के संबंध में वित्तीय सेवा विभाग के साथ निरंतर संपर्क में हैं। उचित समय आने पर मैं इस बारे में और ज्यादा जानकारी साझा कर पाऊंगा।”
आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शुरू की गई थी ECLGS
ECLGS मई, 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई बाधाओं के संदर्भ में पात्र MSME को उनकी परिचालन देनदारियों को पूरा करने और अपने कामकाज को दोबारा शुरू करने में सहायता प्रदान करना था। इस योजना के दायरे में सभी क्षेत्र शामिल हैं। रजनीश ने कहा कि मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी घरेलू थोक और कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए एमएसएमई संगठनों और राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के साथ लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, ”पिछले 3 महीनों में 1 लाख टन से ज्यादा कच्चा माल उपलब्ध कराया गया है। अगर हम मार्च के आंकड़ों को सालाना आधार पर देखें तो इसमें 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”
उद्यम पोर्टल पर 20 लाख से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों ने कराया पंजीकरण
रजनीश ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। एमएसएमई को समर्थन देने के लिए मंत्रालय स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। अतिरिक्त सचिव ने कहा, ”वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, फरवरी और मार्च में मंत्रालय के उद्यम पोर्टल पर 20 लाख से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों ने पंजीकरण कराया है। वर्तमान में पंजीकृत एमएसएमई की कुल संख्या 60 करोड़ से ज्यादा हो गई है। ये भारत के एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती का संकेत है।” आरबीआई ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए बिना गारंटी वाले कर्ज की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है।


