Friday, January 9, 2026
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क्या सच में सोना इस साल 4800 डॉलर प्रति औस के लेवल को टच कर लेगा? क्या है एक्सपर्ट्स की राय?


Gold Prices: भारत में सोने की कीमतों में बुधवार, 7 जनवरी को भी लगातार तीसरे दिन तेजी जारी रही. सोने की कीमतों में यह उछाल वेनेजुएला में अमेरिका के हवाई हमलों के बाद आया. इससे सुरक्षित निवेश की मांग एक बार फिर से बढ़ गई. इस दौरान 24 कैरेट सोने की कीमतें लगभग 36,000 रुपये प्रति 100 ग्राम तक बढ़ गईं, जो इसके रिकॉर्ड हाई लेवल 1,40,000 रुपये के करीब है. सोने की कीमतों में आई इस तेजी ने एक बार फिर से इसके खरीदारों के सामने मुश्किलें पैदा कर दी है. 

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स? 

साल 2025 में सोने की कीमतों में गजब की तेजी देखी गई. साल के आखिर तक सोना 4500 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया. 7 जनवरी, 2026 तक इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 4,440 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड करता नजर आया. प्रॉफिट टेकिंग के चलते कीमतें 4549 डॉलर के पीक से थोड़ी कम जरूर हुई है, लेकिन अंडरलाइंग ट्रेंड अभी भी बुलिश बना हुआ है.

निवेशक फिलहाल 4450 डॉलर के रेजिस्टेंस लेवल पर करीब से नजर रख रहे हैं. अधिकतर एक्सपर्ट्स साल 2026 के लिए सोने की कीमतें 4500 डॉलर से 5000 डॉलर प्रति औंस के बीच बने रहने की उम्मीद कर रहे हैं. मॉर्गन स्टेनली ने भी 2026 की चौथी तिमाही तक सोने के लिए 4800 डॉलर प्रति औंस का बुलिश टारगेट रखा है. बता दें कि एक औंस 31.1 ग्राम के बराबर है. 

कीमत बढ़ने की कितनी है आशंका?

अगर आने वाले दिनों में वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता रहा, तो इसका असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है. चूंकि सोने की खरीदारी एक सुरक्षित निवेश है इसलिए जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच सेफ-हेवन की डिमांड बढ़ सकती है. इसके अलावा, दुनियाभर के तमाम सेंट्रल बैंक आक्रामक तरीके से सोना खरीदते जा रहे हैं क्योंकि ये सोने को एक डायवर्सिफिकेशन टूल के रूप में देखते हैं.

माइकल विडमर के नेतृत्व में बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों को उम्मीद है कि पूरे साल सोने की औसत कीमत 4538 डॉलर पर रहेगी. इन्होंने यह अनुमान ग्लोबल सप्लाई में कमी और उत्पादन पर बढ़ती लागत के आधार पर लगाया.  

VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा, कम समय में, बढ़ती अनिश्चितता का मतलब यह होगा कि सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतें भी ऊपर जाएंगी. मजबूत औद्योगिक मांग के चलते लंबे समय तक अस्थिरता या ग्लोबल ग्रोथ में मंदी सोने के मुकाबले इसकी कीमत पर ज्यादा दबाव डाल सकती है.”

 

 

 

 

 

 

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