Saturday, September 12, 2026
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पहाड़ों को चीरकर रेलवे ने रचा इतिहास, उत्तराखंड में 10.8 किमी लंबी सुरंग का हुआ ब्रेकथ्रू


उत्तराखंड के दुर्गम और कठिन पहाड़ों के बीच रेल पहुंचाने का सपना अब बहुत तेजी से हकीकत में बदल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। 11 सितंबर 2026 को इस प्रोजेक्ट की एस्केप टनल-1 की खुदाई का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया, जिसे ब्रेकथ्रू कहा जाता है। यह इस पूरी रेल परियोजना का 41वां टनल ब्रेकथ्रू है। इसके साथ ही 10.847 किलोमीटर लंबी यह टनल अब पूरी तरह से आपस में जुड़ गई है, जो इस प्रोजेक्ट की दूसरी सबसे लंबी सुरंग बन गई है।

हिमालय की खतरनाक चट्टानों को मात देकर बनी सुरंग

यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इस टनल के निर्माण के दौरान भारतीय इंजीनियरों को हिमालय के बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण भूविज्ञान का सामना करना पड़ा। टनल का पूरा रास्ता ज्यादा फॉल्टेड और टूटी-फूटी चट्टानों के बीच से होकर गुजरता है। निर्माण के दौरान मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) की मौजूदगी के कारण भारी मलबे, लगातार ढहने वाली मिट्टी और कमजोर चट्टानों की वजह से काफी जोखिम था। हालांकि, आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और सुरक्षा उपायों के दम पर RVNL की Rishikesh PIU टीम ने पहाड़ों का सीना चीरकर इस कठिन काम को अंजाम दिया।

चारधाम यात्रा होगी आसान

इस 41वें ब्रेकथ्रू के साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर तेजी से बढ़ रही है। प्रोजेक्ट में कुल 46 टनल ब्रेकथ्रू होने थे, जिनमें से 41 सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। RVNL के अधिकारियों के अनुसार, बची हुई केवल 5 सुरंगों का ब्रेकथ्रू काम भी अगले एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ी इलाकों तक ट्रेन पहुंचाने का दशकों पुराना सपना साकार हो जाएगा।

उत्तराखंड के लिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी हिमालयी रेलवे परियोजनाओं में से एक है। कर्णप्रयाग तक रेल सेवा शुरू होने से बद्रीनाथ, केदारनाथ, जोशीमठ और हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का समय काफी बचेगा। वहीं, दुर्गम इलाकों में रेल पहुंचने से रोजगार, व्यापार और पर्यटन में कई गुना बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, चीन सीमा के करीब होने के कारण यह रेल लाइन भारतीय सेना के तुरंत आवागमन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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