शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ा खुलासा सामने आया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने करीब ₹144 करोड़ के कथित पंप-एंड-डंप स्कैम का पर्दाफाश किया है। इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि जांच सिर्फ बैंक खातों और ट्रेडिंग रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रही। SEBI ने WhatsApp चैट, एयरलाइन टिकट, होटल बुकिंग, फूड डिलीवरी ऐप के ऑर्डर, वेबसाइट रिकॉर्ड, डोमेन हिस्ट्री और SMS डेटा जैसे डिजिटल सबूतों की मदद से पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। यह मामला बताता है कि अब शेयर बाजार में गड़बड़ी करने वालों के लिए बच निकलना पहले जितना आसान नहीं रहा।
226 लोगों का बड़ा नेटवर्क आया सामने
SEBI की 394 पेज की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2020 के बीच पांच कंपनियों के शेयरों में फेक तेजी दिखाकर निवेशकों को आकर्षित किया गया। जांच में 226 संस्थाओं और लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। नियामक ने इस मामले में लगभग ₹143.79 करोड़ की रकम वापस जमा कराने, करीब ₹47.8 करोड़ का जुर्माना लगाने और कई आरोपियों को 4 से 7 साल तक शेयर बाजार से दूर रखने का आदेश दिया है।
WhatsApp, फ्लाइट टिकट और फूड ऑर्डर बने अहम सबूत
जांच के दौरान मुख्य आरोपी ने कुछ मोबाइल नंबरों से अपना संबंध होने से इनकार किया। इसके बाद SEBI ने उन नंबरों से जुड़ी एयरलाइन बुकिंग, होटल रिजर्वेशन और फूड डिलीवरी ऐप के रिकॉर्ड की जांच की। इन डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल वास्तव में कौन कर रहा था। WhatsApp चैट और अन्य ऑनलाइन एक्टिविटी ने भी आरोपियों के बीच संबंधों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2 करोड़ से ज्यादा SMS भेजकर बढ़ाई गई शेयरों की मांग
SEBI की जांच में सामने आया कि निवेशकों को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर बल्क SMS अभियान चलाया गया। सिर्फ एक शेयर के प्रचार के लिए ही 2.1 करोड़ से ज्यादा SMS भेजे गए। इसके अलावा हजारों निवेशकों तक शेयर खरीदने के संदेश पहुंचाए गए ताकि शेयरों की मांग बढ़े और कीमतों में नकली उछाल आए।
ट्रेडिंग और पैसों के लेन-देन की भी हुई गहन जांच
नियामक ने ट्रेडिंग पैटर्न की भी बारीकी से जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, कई खातों के जरिए सर्कुलर ट्रेडिंग, सिंक्रोनाइज्ड ट्रेड और बार-बार ऑर्डर बदलने जैसी एक्टिविटी की गईं ताकि शेयरों में नकली कारोबार का माहौल बनाया जा सके। इसके बाद बढ़ी हुई कीमतों पर शेयर बेचकर मुनाफा कमाया गया। जांच में पैसों के लेन-देन की पूरी सीरीज को भी ट्रैक किया गया, जिससे अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने में मदद मिली।
कर्मचारियों और ठेकेदारों की भी हुई जांच
इस मामले में कुछ कंपनियों के कर्मचारियों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। SEBI ने उनके बैंक खाते, डीमैट अकाउंट और आयकर रिकॉर्ड की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोगों ने शेयर बेचने के बाद रकम खुद रखने के बजाय उससे जुड़े अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी, जिसे जांच एजेंसी ने संदेहास्पद माना।


