सम्राट सरकार ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर (Bharat Bhushan Tiwari Encounter) मामले में पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा को न्यायिक जांज की जिम्मेदारी सौंपी है. जांच के बाद यह पता चलेगा कि यह फेक एनकाउंटर है या फिर पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई सही है. इन सबके बीच विनोद कुमार सिन्हा को जानिए.
पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा बिहार में कई महत्वपूर्ण न्यायिक और प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उनका जन्म 23 अप्रैल 1958 को हुआ है. 1983 में उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद पटना हाईकोर्ट से उन्होंने वकालत शुरू की थी.
2016 में पटना हाईकोर्ट के बने थे जज
जो जानकारी मिली है उसके अनुसार, वे पटना हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल और बिहार के विधि सचिव के पद पर भी रहे. दिसंबर 2016 में उन्हें पटना हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया और वे 22 अप्रैल 2020 को पटना उच्च न्यायालय से ही रिटायर हुए. विनोद कुमार सिन्हा की स्वच्छ छवि को देखते हुए उस वक्त की नीतीश सरकार ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद अप्रैल 2020 में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था.
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विनोद कुमार सिन्हा ने पटना उच्च न्यायालय में विभिन्न दीवानी, सेवा और आपराधिक मामलों में वकालत की है. 1997 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में बिहार उच्च न्यायिक सेवा में शामिल हुए. उच्च न्यायिक सेवा में अपने न्यायिक करियर के दौरान उन्होंने समस्तीपुर न्यायपालिका के जिला न्यायाधीश और बिहार सरकार के विधि सलाहकार के रूप में काम किया.
पदोन्नति से पहले वे 2014 से पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत थे. उन्हें 9 दिसंबर 2016 को पटना उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. विनोद कुमार सिन्हा पटना के रहने वाले हैं. राजेंद्र नगर के रोड नंबर 3 में उनका मकान है.
बता दें कि भरत तिवारी के केस में भले रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच होगी लेकिन परिवार सीबीआई और सीटिंग जज से जांच की मांग भी कर चुका है. अब देखने वाली बात होगी कि न्यायिक जांच में क्या कुछ रिपोर्ट सामने आती है और कब तक आती है.
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