सरकार ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाले व्यापार बोर्ड (BOT) में 29 गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया है। इनमें एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी, एप्पल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विराट भाटिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा के एमडी अनीश शाह भी शामिल हैं। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सरकारी एवं प्राइवेट सेक्टरों के सीनियर अधिकारियों सहित इस बोर्ड के सदस्य मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं।
2019 में व्यापार विकास एवं संवर्धन परिषद का व्यापार बोर्ड में हो गया था विलय
मंगलवार को जारी वाणिज्य मंत्रालय के एक नोटिफिकेशन के अनुसार, साल 2019 में सरकार ने एक्सपोर्ट और इंपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों के साथ परामर्श प्रक्रिया में बेहतर तालमेल के लिए व्यापार विकास एवं संवर्धन परिषद का व्यापार बोर्ड में विलय कर दिया था। नए गैर-सरकारी सदस्यों में आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की प्रेसिडेंट सुनीता रामनाथकर, अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के प्रेसिडेंट सतीश गोयल, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विक्रमपति सिंघानिया, सोरिन इन्वेस्टमेंट्स के फाउंडर संजय नैयर, एक्सेल के पार्टनर प्रशांत प्रकाश, डावर ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर पूरन डावर, ऑलकार्गो ग्रुप के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन शशि किरण शामिल हैं।
व्यापार बोर्ड में और कौन-कौन शामिल
अन्य सदस्यों में कॉन्टिनेंटल कैरियर्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर वैभव वोहरा, आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के सीईओ दिलीप ओम्मन, सोमानी इम्प्रेसा ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप सोमानी, सियाम के प्रेसिडेंट और टाटा मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा शामिल हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक नोटिफिकेशन में बताया कि इसमें इन-स्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका, ईवाई इंडिया के चेयरमैन और सीईओ राजीव मेमानी और यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की मैनेजिंग डायरेक्टर उपासना अरोड़ा भी शामिल हैं। ये उद्योगपति जिला निर्यात केंद्र कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सूत्रधार के रूप में काम करेंगे।
क्या होगा सदस्यों का काम
इन कार्यक्रमों में जागरूकता कार्यशालाएं, चिन्हित उत्पादों की पहचान और प्रचार शामिल हैं। वे राज्य सरकारों को राष्ट्रीय विदेश व्यापार नीति के हिसाब से निर्यात रणनीतियों को विकसित करने और आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। वे निर्यात बढ़ाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन को नीतिगत उपायों पर सरकार को सलाह भी देंगे, अलग-अलग क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे, बाधाओं की पहचान करेंगे और निर्यात आय को अधिकतम करने के लिए उद्योग-विशिष्ट उपायों का सुझाव देंगे।


