Tuesday, July 14, 2026
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वर्ल्ड अपडेट्स:PM मोदी ने स्लोवाकिया के नेता को बिहारी ठेकुआ गिफ्ट किया, खाने का VIDEO शेयर किया




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले महीने स्लोवाकिया के दौरे पर गए थे। वहां उन्होंने संसद अध्यक्ष रिचर्ड रासी को बिहार का पारंपरिक व्यंजन ठेकुआ गिफ्ट किया था। अब रासी ने ठेकुआ खाते हुए अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो काफी चर्चा में है। वीडियो में रासी गिफ्ट बॉक्स खोलकर ठेकुआ निकालते हैं और उसका स्वाद चखते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक औपचारिक उपहार नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और परंपरा की झलक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी यह ठेकुआ बिहार से लेकर आए थे, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। रासी ने कहा कि ठेकुआ उन्हें स्लोवाकिया की कुछ पारंपरिक मिठाइयों की याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बिहार का ठेकुआ भेंट किया, जबकि उन्होंने बदले में हिंदी में लिखे विशेष स्लोवाक स्पा वेफर्स उपहार में दिए। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ‘शेख हसीना लौटें, कानून का सामना करें’: बांग्लादेश सरकार बोली- वापसी का स्वागत बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित देश वापसी का स्वागत करते हुए कहा है कि उन्हें अदालत का सामना करना होगा। सरकार का कहना है कि उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और अदालत का फैसला कानून के अनुसार लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री के सूचना एवं रणनीति सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि सरकार चाहती है कि शेख हसीना देश लौटें ताकि न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो सके। 78 वर्षीय शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। नवंबर 2024 में ढाका के विशेष न्यायाधिकरण ने छात्र आंदोलन पर कथित दमन और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के मामले में उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद से बांग्लादेश सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। वहीं, शेख हसीना अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों, दोषसिद्धि और मौत की सजा को राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बता चुकी हैं। PoK में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर भारत नाराज, पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की अपील भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने महिलाओं और बच्चों सहित आम नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया, इंटरनेट सेवाएं बंद कीं और आवश्यक राहत सामग्री की आपूर्ति भी रोक दी। नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तान ने अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया है। महिलाओं और बच्चों के साथ भी सख्ती बरती गई है। इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया गया है और जरूरी तथा मानवीय सहायता की आपूर्ति रोक दी गई है।” उन्होंने कहा कि भारत अपेक्षा करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान सरकार को इन कार्रवाइयों के लिए जवाबदेह ठहराए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है और वहां के लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। 80 साल बाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी की मदद से जापान बनाएगा केंद्रीय खुफिया एजेंसी
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान एक केंद्रीकृत खुफिया एजेंसी बनाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार इसके लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे सहयोगी देशों से तकनीक, साइबर सुरक्षा, स्टाफिंग और खुफिया समन्वय के ढांचे पर सलाह ले रही है। करीब 407 मिलियन डॉलर के बजट वाली नई एजेंसी के दिसंबर तक काम शुरू करने की उम्मीद है। इसमें शुरुआती चरण में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और विदेशी संपर्क अधिकारियों सहित सैकड़ों कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। यह एजेंसी विभिन्न सरकारी संस्थानों में खुफिया कार्य से जुड़े लगभग 33 हजार अधिकारियों के बीच सूचना साझा करने और विश्लेषण का केंद्रीय केंद्र बनेगी। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका जापान को साइबर सुरक्षा और औद्योगिक जासूसी रोकने के उपायों पर सलाह दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय की रणनीति साझा कर रहा है, जबकि जर्मनी की विदेशी खुफिया एजेंसी (BND) भी नई एजेंसी की संरचना और इंटेलिजेंस साझेदारी पर चर्चा कर चुकी है। पोलैंड की नेता ने ‘हिटलर’ जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंकी पोलैंड की राजनेता और क्राकोव की मेयर पद की उम्मीदवार मरिआना श्राइबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंक दी। उन्होंने यूक्रेन पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जुड़े विवादित राष्ट्रवादी संगठनों और नेताओं का महिमामंडन करने का आरोप लगाया। वीडियो में श्राइबर ने जेलेंस्की की एक तस्वीर दिखाई, जिस पर हिटलर जैसी मूंछ बनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने तस्वीर को मोड़कर कूड़ेदान में फेंकते हुए कहा कि “अपराधियों का महिमामंडन करने वालों की जगह इतिहास के कूड़ेदान में है।” उन्होंने कहा कि “बांदेरावादी नायक नहीं हैं, बल्कि मानवता के लिए कलंक हैं।” साथ ही आरोप लगाया कि यूक्रेन ने अब तक पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी है। श्राइबर ने यह टिप्पणी 11 जुलाई 1943 की ‘ब्लडी संडे’ घटना की बरसी पर की। पोलैंड के अनुसार, उस दिन यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) ने वोल्हीनिया क्षेत्र के पोलिश गांवों पर एक साथ हमले किए थे। पोलैंड का दावा है कि 1943-44 के दौरान ऐसे हमलों में लगभग एक लाख पोलिश नागरिक मारे गए थे और वह इन घटनाओं को नरसंहार मानता है। EU माइग्रेशन कानून पर विवाद: स्वीडिश सांसद ने डेनिश सांसद के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
यूरोपीय संसद में हाल ही में पारित सख्त माइग्रेशन कानून को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। स्वीडन की सांसद आबिर अल-सहलानी ने डेनमार्क के सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लीय टिप्पणी को लेकर स्वीडिश पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला से भी की है। यह विवाद पिछले महीने यूरोपीय संसद द्वारा पारित रिटर्न रेगुलेशन के बाद शुरू हुआ। नए कानून के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को अवैध प्रवासियों के निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के लिए यूरोपीय संघ के बाहर ‘रिटर्न हब’ स्थापित करने की अनुमति दी गई है। कानून पारित होने के बाद संसद में “उन्हें वापस भेजो” जैसे नारे लगे। इराकी मूल की स्वीडिश सांसद आबिर अल-सहलानी ने इन नारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह कट्टर दक्षिणपंथी राजनीति का चिंताजनक उदाहरण है और इस घटना के बाद उन्होंने संसद में खुद को असुरक्षित महसूस किया। इसके जवाब में डेनिश सांसद क्रिस्टोफर स्टॉर्म ने सोशल मीडिया पर “गो होम” टिप्पणी की। अल-सहलानी ने इसे नस्लीय घृणा फैलाने वाली टिप्पणी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यूरोपीय संघ में माइग्रेशन का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्रवासियों के यूरोप पहुंचने के बाद इस विषय पर सदस्य देशों के बीच मतभेद और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। जर्मनी यूक्रेन को देगा 50 हजार अटैक ड्रोन, 9 करोड़ यूरो की डील की फंडिंग करेगा
जर्मनी यूक्रेन के लिए 50,000 एफपीवी (फर्स्ट-पर्सन व्यू) अटैक ड्रोन खरीदने का वित्तपोषण करेगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ यूरो (10.3 करोड़ डॉलर) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये श्राइक (Shrike) नामक कम लागत वाले अटैक ड्रोन यूक्रेन की कंपनी स्काईफॉल बनाती है। इनमें अमेरिकी कंपनी ऑटेरियन का सॉफ्टवेयर लगा है, जो उड़ान के अंतिम चरण में चलते हुए लक्ष्य की खुद पहचान कर उस पर हमला करने में सक्षम है। ऑटेरियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लॉरेंज मेयर के अनुसार, कुछ ड्रोन पहले ही यूक्रेन को भेजे जा चुके हैं और बाकी की आपूर्ति 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी इस वर्ष विभिन्न निर्माताओं के कम से कम एक लाख ड्रोन के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रही है, जिनकी फंडिंग कई पश्चिमी सरकारें कर रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, स्काईफॉल ने इस सौदे में जर्मनी की भागीदारी की पुष्टि की है, लेकिन और जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, जर्मनी और यूक्रेन के रक्षा मंत्रालयों ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। चीन में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई पार्टी से निष्कासित
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई को कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मा पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मा शिंगरुई को अप्रैल में “कानून और पार्टी अनुशासन के गंभीर उल्लंघन” के आरोप में जांच के दायरे में लिया गया था। जांच में पाया गया कि उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति में दूसरों को अनुचित लाभ पहुंचाया, अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया तथा रिश्तेदारों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति खरीदने में मदद की। शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, मा ने महंगे उपहार स्वीकार किए और अपने परिवार के सदस्यों को सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़े आर्थिक लाभ दिलाए। जांच एजेंसियों ने इसे बड़े पैमाने पर “पारिवारिक भ्रष्टाचार” (फैमिली करप्शन) बताया है। मा शिंगरुई पहले चीन के एयरोस्पेस उद्योग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में वे राजनीति में आए और पोलित ब्यूरो तक पहुंचे। 2025 के बाद किसी मौजूदा पोलित ब्यूरो सदस्य के खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों पर रिसर्च करने वाला अमेरिकी वैज्ञानिक चीन की हिरासत में
चीनी मूल के अमेरिकी भूकंप वैज्ञानिक डॉ. यूलिन चेन को चीन ने जासूसी के आरोप में करीब दो साल से हिरासत में रखा है। अमेरिका ने उन्हें “रॉन्गफुली डिटेन्ड” घोषित करते हुए उनकी रिहाई को शीर्ष कूटनीतिक प्राथमिकता बताया है। चेन उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के भूकंपीय संकेतों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ हैं और उनकी रिसर्च अमेरिकी सरकारी एजेंसियों की फंडिंग से हुई थी। परिवार के अनुसार चेन को नवंबर 2024 में बीजिंग एयरपोर्ट से अमेरिका लौटने से पहले गिरफ्तार किया गया था। मई 2025 में उन पर जासूसी का आरोप लगाया गया, लेकिन अब तक उनका ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। चेन की पत्नी युफांग रोंग का कहना है कि उनकी रिसर्च पूरी तरह सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित थी और इसे सार्वजनिक प्रकाशन की मंजूरी भी मिली थी। इसके बावजूद चीन की सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे 100 से ज्यादा बार पूछताछ की। उनका कहना है कि बंद कमरे में होने वाले ट्रायल में पहले से ही दोषी ठहराए जाने का खतरा है। मानहानि मामले में ब्लूमबर्ग को सिंगापुर के दो मंत्रियों को ₹3 करोड़ से ज्यादा हर्जाना देना होगा
सिंगापुर हाईकोर्ट ने ब्लूमबर्ग और उसके रिपोर्टर लो डे वेई को मानहानि मामले में सिंगापुर के दो मंत्रियों को 4.60 लाख सिंगापुर डॉलर (करीब 3.56 लाख अमेरिकी डॉलर) हर्जाना देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट पढ़ने पर यह संदेश जाता है कि दोनों मंत्रियों ने गैर-पारदर्शी तरीके से संपत्ति के सौदे किए और संभावित जांच से बचने की कोशिश की। यह मामला ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट, जिसमें सिंगापुर के महंगे ‘गुड क्लास बंगले’ के सौदों में अपनाए जाने वाले गोपनीय तरीकों की चर्चा की गई थी, से जुड़ा है। इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय मंत्री के. शनमुगम और श्रम मंत्री टैन सी लेंग के प्रॉपर्टी सौदों का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद दोनों मंत्रियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि रिपोर्ट ने उनके वैध संपत्ति सौदों को शेल कंपनियों, गोपनीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी गतिविधियों के साथ जोड़कर पेश किया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा। ब्लूमबर्ग ने अदालत में दलील दी कि रिपोर्ट में मंत्रियों पर किसी तरह के गलत आचरण का आरोप नहीं लगाया गया था। उनका जिक्र केवल सिंगापुर में हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी लेनदेन के उदाहरण के तौर पर किया गया था। कंपनी ने यह भी कहा कि रिपोर्ट व्यापक शोध और तथ्य जांच के बाद प्रकाशित की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट की जज ऑड्रे लिम ने माना कि रिपोर्ट का स्वाभाविक अर्थ मंत्रियों की ईमानदारी और पेशेवर प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत ने इसे मानहानिकारक मानते हुए ब्लूमबर्ग और उसके रिपोर्टर को संयुक्त रूप से 4.60 लाख सिंगापुर डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया।



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