पश्चिम बंगाल के चुनावी (West Bengal Assembly Election 2026) मैदान में इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है. नदिया के शांतिपुर और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा के बीच करीब 90 किलोमीटर के दायरे में “राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद” का प्रतीकात्मक संघर्ष खड़ा हो गया है. खास बात यह है कि दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवार अपनी-अपनी पार्टियों से बागी होकर मैदान में उतरे हैं. एक पूर्व बीजेपी से जुड़ा चेहरा और दूसरा टीएमसी से अलग हुआ नेता. ऐसे में यह चुनाव सिर्फ सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि पहचान, धर्म और राजनीतिक रणनीति की बड़ी परीक्षा बन गया है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिक गई हैं.
बीजेपी से अलग हुए को राम मंदिर का आसरा
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के शांतिपुर में 29 अप्रैल 2026 को होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले सियासत ने अनोखा रूप ले लिया है. यहां मुकाबला अब सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि “राम बनाम राम” के रूप में देखा जा रहा है. शांतिपुर ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली जगह है. यही वह भूमि है जहां 15वीं सदी के महान कवि कृतिबास ओझा का जन्म हुआ था. उन्होंने वाल्मीकि रामायण का बंगाली रूपांतरण किया, जिसे आज भी बंगाल में व्यापक श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है. इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए अरिंदम भट्टाचार्य 15 बीघा जमीन पर ‘श्री कृतिबास राम मंदिर’ और गंगा किनारे एक हेरिटेज कॉरिडोर विकसित कर रहे हैं. इस अरिंदम निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. 2021 में बीजेपी के टिकट पर वो चुनाव हार गए थे. 2016 वो पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे.
खास बात यह है कि मंदिर का स्वरूप अयोध्या की तर्ज पर होगा, लेकिन इसमें स्थापित होने वाली राम की मूर्ति कृतिबासी रामायण के अनुसार ‘बंगाली स्वरूप’ में होगी. यह मंदिर चंपाटोला, साधुघाट इलाके में बन रहा है, जो मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से करीब 90 किलोमीटर दूर है—वहीं बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति का निर्माण भी चर्चा में रहा है.
बाबरी मस्जिद भी बागी के सहारे
बंगाल का चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है. निलंबित टीएमसी विधायक और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर मस्जिद बनाने की घोषणा की है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बन रही इस मस्जिद को ‘बंगाल बाबरी मस्जिद’ कहा जा रहा है. कबीर ने इसका शिलान्यास कर दिया है और दावा किया है कि यह परियोजना दो साल में पूरी होगी.
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस कदम को सीधे तौर पर वोट बैंक की राजनीति से जोड़ा जा रहा है. कबीर अब अपनी नई पार्टी AJUP के बैनर तले नवदा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और टीएमसी को चुनौती दे रहे हैं. इस मुद्दे पर बीजेपी समेत कई दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे चुनाव से पहले बंगाल की सियासत और ज्यादा ध्रुवीकृत होती दिख रही है.
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आखिरकार, यह चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि नैरेटिव की लड़ाई बन चुका है. बागी उम्मीदवारों के बीच यह मुकाबला बताएगा कि बंगाल की जनता भावनात्मक मुद्दों को चुनती है या राजनीतिक विश्वसनीयता को. नतीजे आने के बाद इसका असर राज्य की राजनीति पर दूर तक दिखेगा.
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