Saturday, April 25, 2026
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दिल्ली: बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाली है मुश्किल? कांग्रेस ने किया दरों में बढ़ोतरी का दावा 


दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीने मुश्किल भरे हो सकते हैं. देवेन्द्र यादव ने दावा किया है कि सरकार की निष्क्रियता के कारण अब बिजली दरों में तेज बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है. उन्होंने कहा कि बिजली अपीलेट ट्रिब्यूनल ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें 38,500 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए अधिक समय मांगा गया था. इस फैसले के बाद अब पुराना बकाया कम समय में वसूला जाएगा, जिससे सीधे उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ेगा.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, 4 साल में वसूली का दबाव

यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के आदेश के अनुसार बिजली कंपनियों को बकाया राशि चार साल में वसूलनी होगी. जबकि डीईआरसी ने इसके लिए सात साल का समय मांगा था. उनका आरोप है कि सरकार की सक्रियता की कमी के चलते उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना खत्म हो गई है और अब इसका सीधा असर बिजली बिलों पर दिखेगा.

बिजली बिलों में 70% तक उछाल का अंदेशा

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने बिजली कंपनियों को दरें बढ़ाने की अनुमति दी तो दिल्ली में बिजली बिलों में 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इसका असर अप्रैल 2026 से रिहायशी और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं पर देखने को मिल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियां यह दावा कर रही हैं कि कई वर्षों से दरें नहीं बढ़ाई गईं, जबकि वास्तविकता यह है कि पीपीएसी और सरचार्ज के जरिए पिछले 2-3 साल में ही 30-40 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है.

डिस्कॉम के मुनाफे पर सवाल, उपभोक्ताओं पर बोझ क्यों

यादव ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को कभी राहत नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और टाटा दिल्ली पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड पर हजारों करोड़ का बकाया वर्षों से लंबित है. यह राशि करीब 38,552 करोड़ रुपये की नियामक संपत्ति के रूप में दर्ज है, जिसे अब उपभोक्ताओं से वसूलने की बात कही जा रही है.

सरकार की चुप्पी पर हमला, उपभोक्ताओं के साथ विश्वासघात का आरोप

उन्होंने कहा कि डिस्कॉम के कर्ज की भरपाई उपभोक्ताओं से कराने के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी सीधे तौर पर जनता के साथ विश्वासघात है. उनका सवाल है कि जब कंपनियां मुनाफा कमा रही थीं तब उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं दी गई और अब नुकसान की भरपाई उनसे क्यों कराई जा रही है.

दरें रोकने और सब्सिडी बढ़ाने की मांग

यादव ने मांग की कि सरकार तुरंत बिजली दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगाए और योजनाबद्ध तरीके से सब्सिडी देने की तैयारी करे. उनका कहना है कि पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे दिल्लीवासियों के लिए यह बढ़ोतरी और भी भारी साबित होगी.

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आने वाले समय में दिल्ली के लोगों पर भारी बिजली बिल का बोझ पड़ेगा. इस स्थिति के लिए उन्होंने मौजूदा सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अब फैसला जनता के हित में लेना जरूरी है.

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