Thursday, July 23, 2026
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर गड्ढों का मामला संसद पहुंचा, सरकार बोली- ‘ठेकेदार ने अपने खर्च पर…’


Delhi Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद उस पर गड्ढे मिलने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है. राज्यसभा में केंद्र सरकार ने स्वीकार किया कि एक्सप्रेसवे पर दो गड्ढे पाए गए थे. हालांकि सरकार ने कहा कि सड़क अभी 10 साल की डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि में है इसलिए निर्माण कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी के तहत बिना सरकारी खर्च के उनकी मरम्मत कर दी. वहीं, सरकार ने यह नहीं बताया कि नई सड़क पर गड्ढे आखिर किस वजह से बने.

राज्यसभा में सरकार ने क्या कहा?

राज्यसभा में सांसद अशोक सिंह के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे अभी 10 साल की डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में है. उन्होंने कहा कि इस दौरान एक्सप्रेसवे पर दो गड्ढे पाए गए थे. ठेकेदार ने अनुबंध के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दोनों गड्ढों की मरम्मत अपने खर्च पर कर दी. इसके लिए सरकार को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ा.

गड्ढों की वजह पर सरकार ने नहीं दिया जवाब

सरकार ने अपने जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया कि नई बनी सड़क पर गड्ढे किस कारण बने. जवाब में सिर्फ इतना कहा गया कि सड़क गारंटी अवधि में है और खराबी मिलने पर निर्माण कंपनी ने उसे ठीक कर दिया.

क्या होता है डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड?

डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड वह तय अवधि होती है, जिसमें सड़क निर्माण से जुड़ी किसी भी तकनीकी खराबी या निर्माण दोष को ठीक करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है. इस दौरान मरम्मत का पूरा खर्च सरकार नहीं बल्कि निर्माण कंपनी उठाती है. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लिए यह अवधि 10 साल तय की गई है.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. करीब 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से हुआ है. उद्घाटन के कुछ महीने बाद मॉनसून के दौरान शामली के पास एक्सप्रेसवे पर गड्ढों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. इसके बाद सड़क की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे. विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा.

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इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की फील्ड स्तर की प्रतिक्रिया में जलभराव और अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था को संभावित वजह बताया गया था. हालांकि राज्यसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने गड्ढों के कारण का कोई उल्लेख नहीं किया.

तीन साल में 103 एजेंसियों पर हुई कार्रवाई

इसी सवाल के जवाब में सरकार ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में खराब गुणवत्ता या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के मामलों में पिछले तीन वर्षों के दौरान 103 एजेंसियों, ठेकेदारों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. इनके खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने, जुर्माना लगाने और अन्य दंडात्मक कदम उठाए गए. सरकार के मुताबिक वर्ष 2023-24 में 29 एजेंसियों, 2024-25 में 29 एजेंसियों और 2025-26 में 45 एजेंसियों पर कार्रवाई की गई.

 



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