Saturday, July 4, 2026
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एथेनॉल वाले E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हैं झूठ, सरकार ने दिए सभी सवालों के जवाब


सरकार ने देश के E20 एथेनॉल कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही तरह-तरह की भ्रामक जानकारियों को लेकर शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया। सरकार ने कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं, जो पूरी तरह से गलत हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 बिंदुओं में स्पष्ट किया कि ये कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन, वैश्विक अनुभव और नियामकीय सुरक्षा उपायों पर आधारित है। इस कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। 

क्या 1 लीटर एथेनॉल बनाने में खर्च होता है 10,000 लीटर पानी

मंत्रालय ने उन दावों को खारिज कर दिया कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है और कहा कि एथेनॉल बनाने के लिए सिर्फ वही अतिरिक्त चावल इस्तेमाल किया जाता है जो देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के बाद बचता है। मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन में प्रति लीटर मात्र करीब 3-5 लीटर प्रसंस्कृत पानी का उपयोग होता है और अब ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ सिस्टम का उपयोग कर पानी का पुनर्चक्रण किया जाता हैं। सरकार ने ये भी बताया कि अब एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मुख्य रूप से मक्का का उपयोग बढ़ा है। मक्का उत्पादन में धान की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है और इसे प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। 

ARAI ने कार और टू-व्हीलर्स पर किया है एथेनॉल वाले पेट्रोल का ट्रायल

गाड़ियों पर प्रभाव को लेकर मंत्रालय ने कहा कि भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (ARAI) ने लगभग 40,000 किलोमीटर (कारों पर) और 20,000 किलोमीटर (दोपहिया वाहनों) पर ट्रायल किए, जिसमें गाड़ी के प्रदर्शन या ईंधन दक्षता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया। केवल माइलेज में कुछ हद तक बदलाव देखा गया। 

कई देशों में इस्तेमाल हो रहा है एथेनॉल मिश्रित ईंधन

सरकार ने ये भी स्पष्ट किया कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग हो रहा है। मंत्रालय ने इंजन क्षति या वारंटी खत्म होने जैसे दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि ऑटो कंपनियां और बीमा कंपनियां स्पष्ट कर चुकी हैं कि E20 के लिए निर्मित गाड़ियों की वारंटी और बीमा वैध रहते हैं। 

क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से खराब हो रहे हैं गाड़ी के इंजन

मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को भी गलत बताया जिसमें कहा गया था कि E20 ईंधन से चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं। अंत में सरकार ने कहा कि E20 कार्यक्रम को लेकर उच्चतम न्यायालय में चर्चा अनुबंध संबंधी मामलों से जुड़ी थी, न कि इस नीति की वैज्ञानिक उपयोगिता पर सवाल से। E20 ईंधन से इंजन खराब होने या वाहन के पुर्जों में जंग लगने के आरोपों पर सरकार ने कहा कि एआरएआई ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के साथ मिलकर अध्ययन किया है। 

फ्यूल टैंक में पानी जाने के दावे को किया खारिज

मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि E20 से गाड़ियों के फ्यूल टैंक में पानी जा सकता है। इसी तरह, पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाए जाने का दावा करने वाले वायरल वीडियो को भी मनगढ़ंत बताया गया। सरकार ने कहा गया कि ईंधन एथेनॉल औद्योगिक प्रक्रियाओं से बनाया जाता है।

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