
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने 5 कैबिनेट सदस्यों के साथ स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने जा रही सालाना मीटिंग में शामिल होंगे। इस समिट में भारत की ओर से भी एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। WEF ने कहा कि इस समिट में कम से कम 64 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जबकि G-7 देशों के 7 में से 6 देशों का प्रतिनिधित्व उनके टॉप लीडरशिप द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम में चीन और पाकिस्तान के बड़े प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अध्यक्ष और सीईओ बोर्गे ब्रेंडे ने बताया कि इस मीटिंग में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी मौजूद रहेंगे।
18 जनवरी से 5 दिनों तक चलेगा समिट
बोर्गे ब्रेंडे ने कहा कि 18 जनवरी से शुरू होने वाली इस 5 दिनों की सालाना मीटिंग में यूक्रेन, गाजा और वेनेजुएला सहित लैटिन अमेरिका की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस का एक बड़ा द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडल और राज्यों के गवर्नर भी इस बैठक में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘संवाद की भावना’ विषय के तहत किया जा रहा है। ब्रेंडे ने कहा कि दुनिया संभवतः 1945 के बाद से सबसे जटिल भू-राजनीतिक स्थिति का सामना कर रही है और आज के समय में संवाद बेहद जरूरी है।
3000 से ज्यादा नेता होंगे शामिल
उन्होंने बताया कि इस साल 3000 से ज्यादा विश्व नेताओं की ऐतिहासिक भागीदारी होगी। इसमें 1700 से ज्यादा व्यापारिक नेता शामिल हैं, जिनमें से आधे सीईओ या अध्यक्ष हैं। इस बैठक में 30 से ज्यादा देशों के विदेश मंत्री, 60 से ज्यादा वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर तथा 30 से ज्यादा व्यापार मंत्री भी शामिल होंगे। एनवीडिया और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के प्रमुखों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”दावोस में हमारे पास पहले कभी इतने तकनीकी दिग्गज नहीं रहे।”
दावोस पहुंचने वाले नेताओं की लिस्ट में कौन-कौन शामिल
मीटिंग में हिस्सा लेने वाले टॉप पॉलिटिकल लीडर्स में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, यूरोपियन कमीशन की हेड उर्सुला वॉन डेर लेयन, चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग और स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन शामिल हैं। अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, आर्मेनिया, अजरबैजान, कोलंबिया, कांगो, इक्वाडोर, फिनलैंड, मोजाम्बिक, पोलैंड, सर्बिया, सिंगापुर, इजरायल और सीरिया के राष्ट्रपति के साथ ही स्पेन, बेल्जियम, ग्रीस, नीदरलैंड, पाकिस्तान, फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण और कतर के प्रधानमंत्री भी बैठक में शामिल होंगे।
भारत से कौन-कौन पहुंचेगा दावोस
भारत से कम से कम 4 केंद्रीय मंत्री- अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रल्हाद जोशी और के राम मोहन नायडू के साथ ही 6 मुख्यमंत्रियों के मीटिंग में हिस्सा लेने की उम्मीद है। साथ ही देश के 100 से ज्यादा टॉप सीईओ भी वहां होंगे। मुख्यमंत्रियों में महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, असम के हिमंत विश्व शर्मा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी और झारखंड के हेमंत सोरेन शामिल हैं। भारत के व्यावसायिक नेताओं में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी, टाटा ग्रुप के एन. चंद्रशेखरन, बजाज ग्रुप के संजीव बजाज, जुबिलेंट भरतिया ग्रुप के हरि एस. भरतिया और टीवीएस मोटर के सुदर्शन वेणु दावोस जाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र, आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक के टॉप अधिकारी भी होंगे शामिल
इस समिट में हिस्सा लेने वाले अन्य नेताओं में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय एस बंगा, आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस, यूनेस्को के महानिदेशक खालिद अल-इनानी, डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला और लंदन के मेयर सादिक खान शामिल हैं।


