मॉस्को/ वॉशिंगटन डीसी9 मिनट पहले
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वीडियो- AI जेनरेटेड
अमेरिका ने बुधवार को वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले 2 टैंकरों को पकड़ लिया। बीबीसी के मुताबिक इसमें से एक रूस का जहाज मैरिनेरा है, जबकि दूसरे का नाम सोफिया है। सोफिया पर पनामा देश का झंडा है, लेकिन यह किस देश का है इसकी जानकारी नहीं है।
ये दोनों जहाज कुछ घंटे के अंतराल पर पकड़े गए। अमेरिका ने रूसी झंडे वाला तेल टैंकर मैरिनेरा को उत्तरी अटलांटिक में जब्त किया, जबकि दूसरा जहाज कैरिबियन सी में पकड़ा गया।
अमेरिकी सैनिक दो हफ्तों से मैरिनेरा जहाज का पीछा कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज वेनेजुएला से तेल लेने जा रहा था, ताकि उसे चीन या दूसरे देशों को पहुंचाया जा सके।
रूस ने अपने जहाज की सुरक्षा के लिए सबमरीन और अन्य नौसैनिक जहाज भेजे थे, लेकिन वे इसे बचाने में सफल नहीं हुए।

रूसी जहाज मैरिनेरा की निगरानी करते हुए यूएस कोस्ट गार्ड के अफसर। फोटो- US European Command
सोफिया जहाज के पकड़े जाने का वीडियो…
पिछले महीने जहाज का नाम बदला था
अमेरिका ने जिस रूसी जहाज को पकड़ा है, पहले इसका नाम बेला-1 था। अमेरिका ने इसे प्रतिबंधित जहाजों की लिस्ट में डाल दिया था। दिसंबर 2025 में यह वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की।
उस समय जहाज के क्रू मेंबर की होशियारी से यह जहाज बच गया था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के पास इस जहाज को जब्त करने का वॉरंट था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और ईरानी तेल ढो रहा था।
तब यह जहाज गुयाना के झंडे के तहत रजिस्टर्ड था। लेकिन इसके बाद इस जहाज का नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ कर दिया गया था। इसके बाद इस पर रूसी झंडा लगाकर इसे देश की ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन लिस्ट में शामिल कर दिया गया।
पकड़े जाने के डर से जहाज ने रास्ता बदला
इसके बाद यह जहाज वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी ब्लॉक के डर से उसने रास्ता बदलकर अटलांटिक की ओर मोड़ लिया था। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश इस जहाज की निगरानी कर रहे थे।
हवाई और समुद्री निगरानी के जरिए इसके हर कदम पर नजर रखी गई। अमेरिकी जहाज USCGC मुनरो ने इसका पीछा करते हुए इसे पकड़ा।
जब अमेरिकी बलों ने इसे उत्तरी अटलांटिक में बोर्ड किया, तब उसके पास रूस का एक सबमरीन और अन्य नौसैनिक जहाज मौजूद थे। हालांकि, कोई सीधा टकराव नहीं हुआ। रूसी मीडिया ने जहाज के पास हेलिकॉप्टर की तस्वीरें जारी की हैं।
रूसी जहाज के पकड़े जाने का वीडियो…
रूस बोला- रजिस्टर्ड जहाज को रोकने का किसी देश को अधिकार नहीं
रूसी परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी देश को दूसरे देश के रजिस्टर्ड जहाज पर ताकत का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है।
मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी सेना ने रूस के समय मुताबिक लगभग दोपहर 3 बजे दोपहर मेरिनेरा जहाज पर कब्जा कर लिया, और इसके बाद जहाज से किसी भी तरह का कम्युनिकेशन बंद हो गया।
रूस ने यह भी कहा कि 24 दिसंबर को मेरिनेरा को रूसी झंडे के तहत चलने की अस्थायी अनुमति दी गई थी।
अमेरिका प्रतिबंधों की वजह से तेल नहीं खरीद पा रहे देश
दरअसल, दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए ‘शैडो फ्लीट’ पर ब्लॉकेड लगाया था। ताकि वे अमेरिका की शर्तें मानें और तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों को जगह दें।
वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से कई टैंकर सीधे तेल नहीं ले जा पा रहे थे। इसलिए वेनेजुएला और उसके ग्राहक (जैसे चीन) ‘शैडो फ्लीट’ का इस्तेमाल कर रहे थे।
‘शैडो फ्लीट’ का मतलब है ऐसे जहाज जो अपने असली स्थान और पहचान को छिपाकर तेल ले जाते हैं। ये टैंकर अपने ट्रांस्पॉन्डर बंद कर देते हैं या झंडा बदल देते हैं ताकि अमेरिका या दूसरे देश उन्हें ट्रैक न कर सकें। इसे ‘डार्क मोड’ भी कहा जाता है।
ब्रिटेन ने जहाज को पकड़ने में मदद की
ब्रिटेन ने अमेरिका को रूसी जहाज पकड़ने में मदद की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना का समर्थन किया और इसमें उसके विमान भी शामिल थे।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हिली ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा-
यह कदम उन लोगों के खिलाफ था, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे। बेला-1 जहाज रूस और ईरान के गठजोड़ का हिस्सा है, प्रतिबंधों से बचते हुए तेल ले जाने की कोशिश कर रहा था। यह जहाज दुनिया भर में सुरक्षा, संघर्ष और अस्थिरता फैलाने में शामिल था।

हिली ने कहा कि वह अपने देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दुनिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए ऐसे अवैध नौसैनिक कामों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा।
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