Thursday, January 15, 2026
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US Carrier USS Abraham Lincoln Moves to Middle East Amid Iran Tensions


वॉशिंगटन डीसी35 मिनट पहले

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ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच अमेरिका ईरान के आस-पास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी में है। अमेरिकी नौसेना का USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ साउथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है।

USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है।

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट न्यूज नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, ये फैसला ईरानी एयरस्पेस के बंद होने के ठीक एक घंटे बाद लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्राइक ग्रुप को चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए साउथ चाइना सी में तैनात किया था, लेकिन अब इसकी मूवमेंट देखी गई है।

इसे मिडिल ईस्ट पहुंचने में करीब एक हफ्ता लग सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। अमेरिका ने वेनेजुएला में भी हमले से पहले इसी तरह तैनाती बढ़ाई थी।

USS अब्राहम लिंकन ने साउथ चाइना सी में 12 जनवरी को लाइव फायरिंग अभ्यास किया

USS अब्राहम लिंकन ने साउथ चाइना सी में 12 जनवरी को लाइव फायरिंग अभ्यास किया

मिडिल ईस्ट में कोई अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात नहीं

न्यूज नेशन की व्हाइट हाउस संवाददाता केली मेयर ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह ग्रुप अब साउथ चाइना सी से सेंट्रल कमांड (CENTCOM) क्षेत्र की ओर जा रहा है। जो मिडिल ईस्ट, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और साउथ एशिया के 21 देशों को कवर करता है।

फिलहाल मिडिल ईस्ट में कोई अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मौजूद नहीं है। इससे पहले USS अब्राहम लिंकन साउथ चाइना सी में रूटीन ऑपरेशन कर रहा था। इसमें एक सुपरकैरियर, 3-6 डिस्ट्रॉयर्स, 1-2 पनडुब्बियां, 7000-8000 सैनिक और 65-70 विमान (F-35, F/A-18 आदि) शामिल हैं।

कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 का हिस्सा है USS अब्राहम लिंकन

USS अब्राहम लिंकन अमेरिका के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (CSG-3) का हिस्सा है, जिसमें एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कई युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल होती हैं।

अमेरिकी नेवी की आधिकारिक वेबसाइट एपरपैक नेवी के मुताबिक, इस ग्रुप में 1 एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के साथ आम तौर पर 3 से 4 गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स होते हैं, जो एयर डिफेंस, एंटी-सबमरीन और लैंड-अटैक ऑपरेशन कर सकते हैं।

इस ग्रुप में 1 क्रूजर भी शामिल किया जाता है, जो ऑपरेशंस के दौरान कमांड और कंट्रोल का काम करता है। हालांकि पिछले कुछ सालों में क्रूजर की जगह डिस्ट्रॉयर्स शामिल किए जाने लगे हैं।

इसके अलावा इस ग्रुप में 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन तैनात रहती हैं, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को ट्रैक करने के साथ-साथ ‘टोमाहॉक’ मिसाइलें दाग सकती हैं।

लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए 1–2 सपोर्ट जहाज (जैसे ऑयलर और सप्लाई शिप) भी साथ चलते हैं। कुल मिलाकर, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 1 कैरियर, 3–6 सर्फेस वॉरशिप, 1–2 पनडुब्बियां और सपोर्ट शिप्स के साथ चलता है।

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट से कर्मचारियों को निकालना शुरू किया

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने कुछ सैन्य अड्डों से कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, कतर में स्थित अल उदैद एयर बेस (जो मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा अमेरिकी बेस है और करीब 10,000 सैनिक तैनात है) से कुछ कर्मचारियों को बुधवार शाम तक निकालने को कहा गया है।

अमेरिकी अधिकारी ने इसे “पोश्चर चेंज” (तैनाती में बदलाव) बताया है, न कि पूरा इवैक्यूएशन। इसका कारण साफ नहीं बताया गया, लेकिन यह ईरान के साथ बढ़ते तनाव से जुड़ा माना जा रहा है।

एक्सपर्ट का कहना है कि कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को इतनी दूर से लाने का मतलब है कि अमेरिका सिर्फ एक छोटे हमले की तैयारी नहीं कर रहा। ऐसा हमला तो लंबी दूरी के B-2 बॉम्बर या पर्शियन गल्फ में मौजूद टॉमहॉक मिसाइल वाले डिस्ट्रॉयर से भी किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूरे कैरियर ग्रुप को इंडो-पैसिफिक से हटाकर लाने का मतलब है कि अमेरिका लंबे समय तक मौजूदगी और जरूरत पड़ने पर लगातार ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है।।

मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात

मिडिल ईस्ट (CENTCOM) में अभी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत है। मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

फिलहाल मिडिल ईस्ट में करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं।

कतर में स्थित अल उदैद एयर बेस, यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य सुविधा है।

कतर में स्थित अल उदैद एयर बेस, यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य सुविधा है।

क्या अमेरिका के आगे टिक पाएगा ईरान

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के अनुसार, ईरान दुनिया की 16वीं सबसे मजबूत सेना है। जिसमें करीब 6 लाख एक्टिव सैनिक, 1,700 से ज्यादा टैंक, 500 से ज्यादा एयरक्राफ्ट और एक मजबूत मिसाइल आर्सेनल शामिल है, लेकिन अमेरिका की तुलना में उसकी एयर फोर्स और नेवी काफी कमजोर है।

अमेरिका के पास 13,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट और 4 लाख से ज्यादा आर्मर्ड व्हीकल हैं। ईरान की ताकत उसकी मिसाइलों में है, जो 2,000 किमी तक की रेंज वाली हैं और पर्शियन गल्फ में अमेरिकी बेस (जैसे कतर का अल उदैद) को निशाना बना सकती हैं।

हाल के वर्षों में ईरान की स्थिति कमजोर हुई है। 2024-25 में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर इजराइल-अमेरिका के हमलों से नुकसान हुआ, जिससे उसकी रक्षा क्षमता प्रभावित हुई।

फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान लंबे समय तक गुरिल्ला-स्टाइल युद्ध लड़ सकता है, ऑयल शिपिंग रूट्स (जैसे हॉर्मुज स्ट्रेट) को ब्लॉक कर सकता है या साइबर हमलों से अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा सकता है।

अमेरिका पहले भी ईरान पर हमला कर चुका है। जून में अमेरिका ने ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। ये ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान थे।

ईरान ने नो फ्लाई जोन घोषित किया था

ईरान ने विरोध प्रदर्शन के बीच सोमवार को अपनी एयरस्पेस को ज्यादातर उड़ानों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया था और नोटिस टू एयर मिशन्स (NOTAM) जारी किया था। हालांकि इसे कुछ घंटों बाद ही हटा लिया गया।

इंडिगो, लुफ्थांसा और एयरोफ्लोट सहित कई एयरलाइंस इससे प्रभावित हुईं और क्षेत्र में बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के बीच कई एयरलाइंस ने ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने का फैसला किया।

इंडिगो ने कहा कि ईरान के अचानक हवाई क्षेत्र बंद करने के कारण उसकी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। वहीं, एयर इंडिया ने कहा कि जो उड़ानें इस क्षेत्र से होकर गुजरती हैं, वे अब दूसरे रास्तों का उपयोग कर रही हैं, जिससे देरी हो रही है।

ईरान में बीते 19 दिन से प्रदर्शन जारी

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा कई कारणों से भड़की है। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं।

महंगाई और आर्थिक संकट: ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 1,455,000 से 1,457,000 रियाल (ओपन मार्केट रेट) हो गई है। चाय, ब्रेड जैसी रोजमर्रा की चीजें भी बहुत महंगी हो गईं (महंगाई 50-70% से ज्यादा)।

व्यापारियों की हड़ताल: 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बड़े बाजार के व्यापारियों ने दुकानें बंद कर विरोध शुरू किया, जो तेजी से पूरे देश में फैल गया। लोग बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान हैं।

सरकार के खिलाफ गुस्सा: लोग सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक की पूरी व्यवस्था के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। कई लोग पुरानी राजशाही (शाह का शासन) वापस लाने की मांग कर रहे हैं।

कठोर कार्रवाई: सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग, गोलियां चलाईं, जिससे हजारों मौतें हुईं (अनुमान 2,000 से 12000 तक, विभिन्न स्रोतों के अनुसार)। इंटरनेट और फोन बंद कर दिए गए, जिससे हिंसा और बढ़ी।

अंतरराष्ट्रीय तनाव: ईरान सरकार, अमेरिका और इजराइल को हिंसा भड़काने का जिम्मेदार बता रही है। ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और हस्तक्षेप की धमकी दी थी।

ईरान में बीते 19 दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की तस्वीर जलाती एक ईरानी लड़की।

ईरान में बीते 19 दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की तस्वीर जलाती एक ईरानी लड़की।

वेनेजुएला में भी ट्रम्प ने पहले तैनाती बढ़ाई, फिर हमला किया था

वेनेजुएला के आसपास भी अमेरिका ने ऐसे सैन्य तैनाती बढ़ाई थी। 2025 के अगस्त महीने से शुरू होकर, अमेरिकी सरकार ने कैरिबियन सागर में (वेनेजुएला के तट के नजदीक) अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से बढ़ाया।

इस ऑपरेशन का नाम साउदर्न स्पीयर था। अमेरिका ने यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर) को अक्टूबर 2025 में यूरोप से सीधे कैरिबियन भेज दिया।

यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कई डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और अन्य जहाजों के साथ आया, जिसमें हजारों फाइटर जेट (जैसे F-35), हेलीकॉप्टर और अन्य हथियार शामिल थे। कैरियर को वेनेजुएला के तट से सिर्फ 100-450 किलोमीटर दूर रखा गया।

इसके अलावा, अमेरिका ने कैरिबियन क्षेत्र में करीब 15,000 सैनिक तैनात किए, जिसमें प्यूर्टो रिको, US वर्जिन आइलैंड्स और अन्य जगहों पर बेस बढ़ाए गए। F-35 फाइटर जेट, स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट, बॉम्बर, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्लेन भी भेजे गए।

जनवरी 2026 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने वेनेजुएला में छापेमारी की और राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया। इसके बाद ट्रम्प ने वेनेजुएला को अपने कंट्रोल में लिया।

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