हर साल लाखों युवा अपने सपनों में UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षा पास करके देश का अधिकारी बनने का सपना देखते हैं. सालों की मेहनत, रातों की नींद की कुर्बानी और किताबों के बीच बिताए हुए अनगिनत घंटे जब रंग लाते हैं, तो फाइनल रिजल्ट में उनका नाम चमकता है. ऐसे में एक सामान्य युवा अचानक ऑफिसर ट्रेनी (Officer Trainee OT) बन जाता है, लेकिन असली सफर तो इसके बाद ही शुरू होता है.
इस सफर की शुरुआत मसूरी (उत्तराखंड) की ठंडी वादियों में स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) से होती है. यह सिर्फ एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं है, बल्कि एक प्रयोगशाला है जहां देश के भविष्य के अधिकारी तैयार होते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि UPSC CSE क्लियर होते ही क्या कैंडिडेट्स तुरंत नौकरी जॉइन कर लेते हैं, इसका पूरा प्रोसेस क्या है.
UPSC CSE क्लियर होते ही क्या कैंडिडेट्स तुरंत नौकरी जॉइन कर लेते हैं
UPSC CSE क्लियर होते ही उम्मीदवार तुरंत नौकरी जॉइन नहीं कर लेते हैं. परीक्षा पास करना सिर्फ पहला कदम है. इसके बाद उन्हें कई स्टेप्स और ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, जो उन्हें असली अधिकारी बनाने के लिए जरूरी हैं.
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इसका पूरा प्रोसेस क्या है
1. फाइनल मेरिट और चयन – UPSC में पास होने के बाद उम्मीदवारों की फाइनल मेरिट लिस्ट आती है. इसी के आधार पर उन्हें IAS, IPS, IFS या अन्य सेवाओं के लिए अलॉट किया जाता है.
2. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षा – फाइनल लिस्ट के बाद उम्मीदवारों के ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट चेक किए जाते हैं और उनकी शारीरिक और मानसिक फिटनेस की मेडिकल परीक्षा होती है.
3. LBSNAA में ट्रेनिंग (Foundation Course) – डॉक्यूमेंट्स और मेडिकल क्लियर होने के बाद IAS, IPS, IFS जैसी सेवाओं के उम्मीदवारों को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है. जिसमें फाउंडेशन कोर्स, सभी नए अफसरों के लिए 15 हफ्तों का बेसिक ट्रेनिंग कोर्स और इसके बाद स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग IPS, IFS, IRS जैसे अलग-अलग कोर्स, IAS अफसर LBSNAA में अगले 2 साल रहकर ट्रेनिंग लेते हैं.
4. फील्ड ट्रेनिंग – LBSNAA में बेसिक ट्रेनिंग पूरी होने के बाद IAS ट्रेनीज को उनके अलॉट किए गए राज्य में एक साल की फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. यहां वे SDM के तौर पर प्रशासनिक काम सीखते हैं.
5. स्टाइपेंड – ट्रेनिंग के दौरान उम्मीदवारों को सैलरी नहीं बल्कि स्टाइपेंड मिलता है. जिसमें लगभग 35,000 – 40,000 टेक होम होता है.
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