Can Slow Heart Rate Affect Health: दिल की धड़कन की रफ्तार और उसका पैटर्न हमारी दिल की सेहत के बारे में कई अहम संकेत देता है. दिल की धड़कन में होने वाले बदलाव न सिर्फ शरीर की स्थिति बताते हैं, बल्कि कई बार गंभीर बीमारियों की चेतावनी भी दे सकते हैं. जरूरत से ज्यादा धीमी धड़कन भी हमेशा सामान्य नहीं होती. यह ब्रैडीकार्डिया की गंभीर स्थिति का संकेत हो सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि यह आपके लिए कितना खतरनाक है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल, नई दिल्ली के हृदय रोग विशेषज्ञ और डिवाइस स्पेशलिस्ट डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि “यह वह स्थिति है, जब दिल की धड़कन लगातार 60 बीट प्रति मिनट (BPM) से कम रहती है. यह स्थिति इसलिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि ऐसी हालत में दिल शरीर तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून नहीं पहुंचा पाता, जिससे ऊर्जा स्तर और ओवरऑल हेल्थ पर असर पड़ता है. एक मिनट में सामान्य इंसान की धड़कन 60 से 100 बार धड़कता है.”
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
धीमी दिल की धड़कन किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम ज्यादा रहता है. डॉ. प्रमोद बताते हैं कि बुजुर्ग, पहले से दिल की बीमारी से जूझ रहे लोग, डायबिटीज या किडनी की समस्या वाले मरीज और कुछ खास दवाएं लेने वाले लोगों को खासतौर पर सतर्क रहना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए नियमित रूप से हार्ट रेट की जांच और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि चक्कर आना, थकान या बेहोशी जैसी दिक्कतों से बचा जा सके.
जब दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम, जो उसकी धड़कन को कंट्रोल करती है, सही तरीके से काम नहीं करती, तो दिल की रफ्तार धीमी हो सकती है. हालांकि एथलीट्स में धीमी धड़कन सामान्य मानी जाती है, लेकिन आम लोगों के लिए यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है.
किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर लगातार थकान और कमजोरी महसूस हो, चक्कर आए या हल्कापन लगे, अचानक बेहोशी जैसा एहसास हो, हल्की गतिविधि में भी सांस फूलने लगे या सीने में दर्द और बेचैनी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये सभी लक्षण धीमी दिल की धड़कन का संकेत हो सकते हैं और समय रहते जांच और इलाज के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. हालांकि, एक्सपर्ट बताते हैं कि ब्रैडीकार्डिया के सभी कारणों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही लाइफस्टाइल अपनाकर इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव से दूरी और समय-समय पर हेल्थ चेकअप दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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