What Are the Early Skin Signs of Diabetes: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने भारत में डायबिटीज़ को उभरते हुए बड़े स्वास्थ्य जोखिम के रूप में चिन्हित किया है. देश में एनसीडी में डायबिटीज सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. लगभग 9 करोड़ वयस्क इससे प्रभावित हैं और अनुमान है कि 2026 तक यह संख्या 10 करोड़ के पार पहुंच सकती है. अक्सर लोग ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, धुंधला दिखना जैसे लक्षणों को ही डायबिटीज़ का संकेत मानते हैं. लेकिन त्वचा पर दिखने वाले कुछ बदलाव भी ब्लड शुगर असंतुलन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं. चलिए आपको इसके 7 लक्षण आपको बताते हैं.
डायबिटीज से जुड़े 7 सामान्य त्वचा संकेत
डायबिटिक डर्मोपैथी
पिंडलियों पर छोटे, गोल, भूरे या लाल धब्बे दिख सकते हैं. ये दर्द या खुजली नहीं करते, लेकिन ब्लड वेसल्स में बदलाव का संकेत हो सकते हैं. Journal of Cardiovascular Disease Research के अनुसार, 25 प्रतिशत से अधिक डायबिटीज मरीजों में त्वचा संबंधी बदलाव छोटे ब्लड वेसल्स और नसों के नुकसान से जुड़े पाए गए.
एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स
गर्दन, बगल, जांघों या उंगलियों के जोड़ पर गहरे, मोटे और मखमली धब्बे दिखना इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है. Indian Journal of Dermatology, Venereology and Leprology के मुताबिक, यह मोटापे और डायबिटीज से जुड़ा अहम त्वचा संकेत है.
घाव का देर से भरना
अगर चोट या जख्म जल्दी नहीं भरते, तो इसका कारण ब्लड फ्लो और नसों की क्षति हो सकती है.Arteriosclerosis, Thrombosis, and Vascular Biology जर्नल के अनुसार, इम्यून सेल्स की गड़बड़ी और टिश्यू मरम्मत में कमी से क्रॉनिक घाव बन सकते हैं, खासकर डायबिटिक फुट अल्सर में.
बार-बार फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन
ब्लड शुगर बढ़ने से इम्युनिटी कमजोर होती है, जिससे फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन बार-बार हो सकते हैं. यह बात Journal of Pure and Applied Microbiology में भी बताई गई है.
खुजली और रूखी स्किन
हाई बीपी शुगर शरीर से तरल पदार्थ खींच लेता है, जिससे त्वचा सूखी और खुजलीदार हो सकती है. छोटे ब्लड वेसल्स की क्षति के कारण पसीना और तेल का रिसाव कम हो जाता है. Frontiers in Medicine (2025) में भी इसे डायबिटीज़ से जुड़ा संकेत बताया गया है.
नेक्रोबायोसिस लिपॉइडिका
यह रेयर लेकिन गंभीर संकेत है, जिसमें पिंडलियों पर चमकदार लाल-भूरे या पीले धब्बे बन सकते हैं. त्वचा पतली होकर नसें दिखाई दे सकती हैं. International Journal of Molecular Sciences के अनुसार, यह लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों में ज्यादा दिखता है.
विटिलिगो
इस स्थिति में त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग उड़कर सफेद हो जाता है. टाइप-1 डायबिटीज़ एक ऑटोइम्यून बीमारी है, इसलिए विटिलिगो ऐसे मरीजों में ज्यादा देखा जाता है. टाइप-2 में यह मेटाबॉलिक तनाव और इम्यून गड़बड़ी से जुड़ा हो सकता है. Cutaneous Manifestations in Diabetes और ICMR भी डायबिटीज कंट्रोल में स्किन जांच को जरूरी मानते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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