बीजिंग4 मिनट पहले
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पीएम मोदी इससे पहले 2019 में SCO समिट में शामिल होने चीन गए थे।
प्रधानमंत्री मोदी दो दिन की जापान यात्रा के बाद शनिवार को SCO समिट में शामिल होने के लिए चीन पहुंच गए हैं। वे सात साल बाद चीन पहुंचे हैं।
SCO समिट से इतर पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन के दिसंबर में भारत दौरे के प्रोग्राम पर भी चर्चा होगी।
पीएम मोदी की यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब पूरी दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों से जूझ रही है। ट्रम्प ने भारत पर 50% तो चीन पर 30% टैरिफ लगाया है।
चीन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक SCO समिट की बैठक होने वाली है। इसमें 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे।
एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत की तस्वीरें…

पीएम मोदी चीन पहुंचने के बाद प्लेन से उतरते हुए।

एयरपोर्ट पर चीन की एक बच्ची पीएम मोदी को गुलदस्ता देकर उनका स्वागत करते हुए।

पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर भारतीय और चीनी अधिकारियों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया।

भारतीय पीएम के स्वागत में एयरपोर्ट पर कलाकारों ने पारंपरिक चीनी डांस किया।

पीएम मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट बिछाया गया।
भारतीय प्रवासियों ने वंदे मातरम के नारे लगाए
प्रधानमंत्री के तियानजिन के एक होटल में पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। भारतीय प्रवासियों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए।
वहीं चीनी कलाकारों ने पीएम मोदी के सामने भारतीय शास्त्रीय संगीत और डांस का प्रदर्शन किया। ये कलाकार कई सालों से भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य सीख रहे हैं।
चीनी कलाकार क्लासिकल संगीत की परफॉर्मेंस देते हुए
चीनी कलाकारों ने ओडिसी डांस की प्रस्तुति दी
पीएम मोदी ने चीन में भारतीय समुदाय से मिलने के बाद ट्वीट किया
मोदी का चीन दौरा खास क्यों है
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक PM मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और द्विपक्षीय बातचीत को बढ़ावा देने का एक बड़ा मौका साबित हो सकती है।जिनपिंग इस समिट के जरिए दुनिया को यह दिखाने की कोशिश करेंगे वे अमेरिका के लीडरशिप वाले ग्लोबल ऑर्डर का एक विकल्प दे सकते हैं।
इसके साथ ही इस समिट से यह मैसेज भी जाएगा कि चीन, रूस, ईरान और अब भारत को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशें नाकाम रही हैं।जून 2025 में किंगदाओ में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया था, क्योंकि उसमें 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र नहीं था।
अब SCO नेताओं के शिखर सम्मेलन में इसका जिक्र किया जा सकता है। साथ ही आतंकवाद के मुद्दे पर भारत सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगा। गौरतलब हो कि पाकिस्तान भी SCO का सदस्य है।

पिछले महीने जयशंकर ने चीन का दौरा किया
पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन का दौरा किया था, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की।
जयशंकर ने जल संसाधन डेटा शेयर करने, व्यापार प्रतिबंधों, LAC पर तनाव कम करने और आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने जैसे मुद्दों पर बात की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात ने मोदी की चीन यात्रा का रोडमैप तैयार किया था।

एस जयशंकर ने पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर उन्हें भारत-चीन के रिश्तों में हुई प्रगति के बारे में बताया था।
आखिरी बार रूस में मिले थे मोदी और जिनपिंग
मोदी और जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई थी।
50 मिनट की बातचीत में पीएम मोदी ने कहा था कि ‘सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों की नींव बनी रहनी चाहिए।

2019 में भारत दौरे पर आए थे जिनपिंग
शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत दौरे पर आए थे। तब दोनों नेताओं ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मुलाकात थी। यह यात्रा भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने और आपसी मतभेदों को प्रबंधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।
दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर भी सहमति जताई थी।

PM मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग तमिलनाडु के महाबलिपुरम में हाथ उठाकर एकजुटता का संदेश देते हुए। तस्वीर 11 अक्टूबर 2019 की है।
अब SCO के बारे में जानिए, जिसकी समिट में पीएम मोदी जा रहे हैं…
2001 में हुई थी SCO की स्थापना
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना।
SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है।

इस बार की SCO समिट खास क्यों है
1. गलवान झड़प के बाद मोदी का पहला चीन दौरा: 5 साल पहले भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद यह पहला मौका है जब मोदी चीन पहुंचे हैं। इस वजह से पूरी दुनिया की नजर इस समिट और मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर है।
2. ट्रम्प का SCO देशों पर हाई टैरिफ: ट्रम्प ने भारत (50%), चीन (30%), कजाकिस्तान (25%) समेत बाकी SCO देशों पर भी हाई टैरिफ लगाया है। ऐसे में यह उन देशों के लिए अहम है जो अमेरिकी दबाव के खिलाफ साझा मंच पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं।
3. अमेरिका की लीडरशिप को चुनौती: जिनपिंग इस समिट को अमेरिका के नेतृत्व वाले ग्लोबल ऑर्डर का विकल्प पेश करने का मंच बनाना चाहते हैं। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह रूस, भारत, ईरान जैसे देशों के साथ मिलकर ऑप्शनल पावर बन सकता है।
4. भारत का एजेंडा- आतंकवाद पर फोकस: जून 2025 में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने जॉइंट स्टेटमेंट पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था। दरअसल, उसमें पहलगाम आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं था। अब मुख्य मीटिंग में भारत, आतंकवाद पर चर्चा और समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा। पाकिस्तान की मौजूदगी में यह मुद्दा छाया रहेगा।
5. 20 से ज्यादा देशों की मौजूदगी: इस बार समिट में सिर्फ SCO सदस्य ही नहीं, बल्कि ऑब्जर्वर और पार्टनर देशों को मिलाकर 20 से ज्यादा देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं।
6. भारत-चीन में रिश्ते बेहतर हुए: गलवान के बाद पहली बार सीमा और व्यापार पर कुछ नरमी दिखी है। सीधी उड़ानें शुरू हुईं, बॉर्डर ट्रेड पर बातचीत हुई, कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल हुई।
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जापान में मोदी ने बुलेट ट्रेन का सफर किया:इसे चलाने की ट्रेनिंग ले रहे भारतीय ड्राइवरों से मिले; SCO समिट के लिए चीन रवाना

PM मोदी शनिवार को जापान दौरे के दूसरे दिन एडवांस बुलेट ट्रेन E10 देखने मियागी प्रांत के सेंडाई पहुंचे। यहां उनके साथ जापान के PM शिगेरू इशिबा भी मौजूद थे।
दोनों नेताओं ने ट्रेन में सफर भी किया। इस दौरान उन्होंने भारत के ट्रेन ड्राइवरों से मुलाकात भी की। इन्हें जापान का ईस्टर्न रेलवे ट्रेनिंग दे रहा है। ये भारत में चलने वाली बुलेट ट्रेनों को चलाएंगे।
सेंडाई पहुंचने पर स्थानीय लोगों और भारतीय समुदाय ने उनका स्वागत किया। लोग हाथों में झंडे लेकर ‘जापान में आपका स्वागत है, मोदी सैन!’ के नारे लगा रहे थे। यहां पढ़ें पूरी खबर…