Wednesday, February 4, 2026
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Maharashtra: मीरा-भायंदर की मेयर चुनी गईं डिंपल मेहता, अमराठी होने पर मच रहा बवाल!


मीरा-भायंदर नगर निगम में महापौर पद के लिए हुए चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार डिंपल मेहता को सर्वसम्मति से महापौर चुना गया. यह चुनाव हाल ही में संपन्न 29 नगर पालिकाओं के चुनावों के बाद महापौर चयन प्रक्रिया के तहत मीरा-भायंदर नगर निगम परिसर में हुआ. मतदान मराठी एकीकरण समिति के विरोध के बावजूद संपन्न हुआ और डिंपल मेहता को स्पष्ट बहुमत मिला.

बता दें कि मीरा-भायंदर नगर निगम में महापौर पद को लेकर चुनाव से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया था. मराठी एकीकरण समिति ने यह मुद्दा उठाया कि शहर को केवल मराठी महापौर ही स्वीकार्य है, लेकिन बीजेपी ने इस विरोध को दरकिनार करते हुए चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई.

आवेदन वापसी की अवधि में किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन वापस नहीं लिया. मतदान के दौरान बीजेपी के 78 पार्षदों और 1 निर्दलीय पार्षद ने डिंपल मेहता के पक्ष में हाथ उठाया. इस तरह कुल 79 मतों के साथ डिंपल मेहता को महापौर चुने जाने का निर्णय हुआ. इस प्रक्रिया के दौरान नगर निगम सदन में विरोध और समर्थन, दोनों की तस्वीर साफ दिखाई दी.

उप महापौर चयन और वोटों का गणित

महापौर के साथ-साथ उप महापौर पद के लिए भी मतदान कराया गया. बीजेपी के ध्रुवकिशोर पाटिल को इस पद के लिए कुल 79 वोट प्राप्त हुए और उन्हें मीरा-भायंदर नगर निगम का उप महापौर नियुक्त किया गया.

मीरा-भायंदर विकास अघाड़ी के 16 पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार रुबीना शेख का समर्थन किया. डिंपल मेहता को 79 वोट मिले, जबकि रुबीना शेख को 16 वोट प्राप्त हुए. इस प्रकार डिंपल मेहता ने भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की. वोटिंग के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सदन में भाजपा की स्थिति मजबूत रही.

डिंपल मेहता के महापौर बनने पर हो रहा विवाद!

डिंपल मेहता के अमराठी महापौर बनने की संभावना के साथ ही शहर की राजनीति में नया विवाद उभर आया. मराठी एकीकरण समिति ने MNS के साथ मिलकर नगर निगम के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और केवल मराठी महापौर की मांग दोहराई.

इस बीच BJP विधायक प्रताप सरनाइक ने एबीपी माझा से बातचीत में समिति की आलोचना की. उन्होंने कहा कि समिति ने पहले उबाथा और एमएनएस का समर्थन कर BJP के 28 पार्षदों को हरवाया था और उसी का परिणाम आज विरोध के रूप में सामने आ रहा है. सरनाइक ने यह भी सवाल उठाया कि पहले गीता जैन के महापौर बनने और नरेंद्र मेहता के विधायक बनने पर विरोध क्यों नहीं हुआ, जबकि क्षेत्र में अमराठी समुदाय की आबादी लगभग 80 प्रतिशत है. 



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