Wednesday, March 4, 2026
Homeस्वास्थKidney Disease Symptoms: सावधान! अक्सर 'साइलेंट' होती है किडनी की बीमारी, इन...

Kidney Disease Symptoms: सावधान! अक्सर ‘साइलेंट’ होती है किडनी की बीमारी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज


Early Warning Signs Of Kidney Problems: किडनी हमारे शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है. ये खून से गंदगी और टॉक्सिन्स को फिल्टर करती हैं, शरीर में फ्लुइड का संतुलन बनाए रखती हैं और कई जरूरी एक्टिविटी को सपोर्ट करती हैं. लेकिन अगर इनकी सही देखभाल न की जाए तो कई तरह की बीमारियां जन्म ले सकती हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि किडनी की बीमारी अक्सर चुपचाप बढ़ती है और लक्षण तब सामने आते हैं, जब स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है. इसलिए समय-समय पर जांच और जोखिम कारकों की जानकारी बेहद जरूरी है.

क्यों किडनी को दिक्कत होती है?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्थान मायो क्लिनिक के अनुसार, किडनी के काम करने की क्षमता में किसी भी तरह की रुकावट को किडनी रोग कहा जाता है. इनमें किडनी इंफेक्शन, क्रॉनिक किडनी डिजीज, पथरी, ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिसऔर पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज समस्या) शामिल हैं. कुछ स्थितियां किडनी रोग का खतरा बढ़ा देती हैं, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान और परिवार में किडनी फेलियर का पुराना केस होना. इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में भी खतरा ज्यादा रहता है.

क्यों जरूरी है किडनी का सेहतमंद रहना?

किडनी सिर्फ शरीर से गंदगी निकालने का काम नहीं करती. ये ऐसे हार्मोन बनाती हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करते हैं. इसके साथ ही इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखना और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालना भी इनकी जिम्मेदारी है. अगर किडनी ठीक से काम न करे तो इन सभी प्रक्रियाओं पर असर पड़ता है. दुनियाभर में किडनी रोग के मामले बढ़ रहे हैं और इनका सीधा संबंध हार्ट रोगों से भी जुड़ा है, किडनी की खराबी से हार्ट की बीमारी से मौत का खतरा बढ़ जाता है और डायबिटीज व हाइपरटेंशन की दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं. इलाज न मिलने पर यह स्थिति किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है, जहां डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है.

इसे भी पढ़ें- Motherhood Age In India: भारत में किस उम्र की महिलाएं ज्यादा बन रहीं मां, किस ऐज ग्रुप की महिलाएं कब ले रहीं यह फैसला?

क्या होते हैं इसके लक्षण?

अगर लक्षण की बात करें, तो किडनी की बीमारी शुरुआत में अक्सर बिना लक्षण के रहती है. लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, बार-बार यूरिन आना, टखनों और पैरों में सूजन, भूख कम लगना और वजन घटना, यूरिन में खून या झाग आना, त्वचा का सूखना और खुजली, सांस लेने में तकलीफ, आंखों के आसपास लगातार सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन और नींद न आने की दिक्कत हो सकती है. इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

कौन-कौन से टेस्ट जरूरी हैं?

अगर लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. रेगुलर जांच से समस्या का शुरुआती स्टेप में पता लगाया जा सकता है. आमतौर पर ये टेस्ट कराए जाते हैं, उसमें सीरम क्रिएटिनिन, सिस्टेटिन C, अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट , ब्लड यूरिया नाइट्रोजन , यूरिन जांच और यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो शामिल है.

यह भी पढ़ें: क्या खाली पेट काम करता है दिमाग ज्यादा बेहतर? जानिए फास्टिंग का मेंटल हेल्थ पर असर और फायदे

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments