Saturday, February 28, 2026
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JNU में पुलिस-छात्रों में टकराव, 26 तारीख को लॉन्ग मार्च में भिड़ंत के बाद 14 गिरफ्तार; AISA ने लगाए गंभीर आरोप


जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में 26 फरवरी 2026 को छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की कोशिश की. यह मार्च मुख्य रूप से वाइस चांसलर संतिश्री धुलिपुडी पंडित के कथित जातिवादी बयानों के खिलाफ था, जिन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में UGC की इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर ‘परमानेंट विक्टिमहुड’ वाली बात कही, जिसे छात्रों ने दलितों और पिछड़ों के खिलाफ अपमानजनक माना. 

साथ ही, छात्र UGC की इक्विटी (एंटी-डिस्क्रिमिनेशन) रेगुलेशंस लागू करने, प्रस्तावित ‘रोहित वेमुला एक्ट’ बनाने और VC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. मार्च को रोकने के लिए मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात था, जहां कई लेयर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी. छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया, महिला छात्राओं को घसीटा और बर्बरता की. 

पुलिस ने दी जानकारी- प्रदर्शनकारियों ने किया था हमला

वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, लाठियां और जूते फेंके, अधिकारियों पर हमला किया और कुछ पुलिसकर्मियों को काटा भी. इस टकराव में दोनों पक्षों को चोटें आईं—पुलिस के मुताबिक उनके कई जवान घायल हुए, जबकि छात्रों ने भी कई लोगों के घायल होने की बात कही.

घटना की शुरुआत दोपहर करीब 3:20 बजे हुई, जब छात्र मुख्य गेट से बाहर निकलने लगे. पुलिस ने उन्हें नॉर्थ गेट पर रोका और वापस कैंपस में धकेल दिया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज में पुरुष पुलिसकर्मी महिला छात्राओं को घसीटते नजर आ रहे हैं, जबकि पुलिस की ओर से शेयर किए गए फुटेज में छात्र अधिकारियों से भिड़ते दिख रहे हैं. 

शाम तक कुछ छात्रों को वसंत कुंज नॉर्थ और कापसहेड़ा थानों में ले जाया गया और वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 221, 121(1), 132 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास मार्च की अनुमति नहीं थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी. JNUSU ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया है.

कोर्ट ने सभी 14 छात्रों को दी जमानत

इस घटना के अगले दिन, 27 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने 14 गिरफ्तार छात्रों को 25,000 रुपये के बॉन्ड पर जमानत दे दी और पुलिस की ज्यूडिशियल कस्टडी की मांग ठुकरा दी. हालांकि, अदालत ने छात्रों के स्थायी पते की जांच की शर्त रखी, जिस पर छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई. 

AISA नेता ने पुलिस पर लगाए मार-पीट के आरोप

JNUSU के पूर्व अध्यक्ष और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेता धनंजय ने ABP न्यूज से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई को ‘प्रतिशोधपूर्ण’ बताया. उन्होंने कहा, “26 तारीख को सबको मालूम है कि किस तरह से बेरहमी से छात्रों को मारा-पीटा गया और डिटेन करके अलग-अलग थानों में ले जाया गया. फिर उनको गिरफ्तार किया गया. दिल्ली पुलिस का कोर्ट में तर्क इतना कमजोर था कि अदालत ने इसे ‘अनएक्सेप्टेबल’ कहा.”

धनंजय ने आगे कहा कि कई छात्र बुरी तरह घायल हैं. पुलिस ने बर्बरता से पीटा, कपड़े फाड़े और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर वाले छात्रों को खास निशाना बनाया. “साफ पता चलता है कि दिल्ली पुलिस को FIR करने में दिलचस्पी नहीं, बल्कि बदला लेने में है.” उन्होंने जेल की स्थिति पर भी सवाल उठाए: “जेल में बेसिक सुविधाएं नहीं मिल रहीं. दवाइयां, मेडिकल ट्रीटमेंट कुछ नहीं. चादर-कपड़े तक नहीं दिए जा रहे.” 

वाइस चांसलर पर भी साधा निशाना

धनंजय ने VC पर भी निशाना साधा, “वाइस चांसलर ने दलित उत्पीड़न का मजाक उड़ाया. UGC का रोहित वेमुला एक्ट पर आधारित रेगुलेशन, जो कैंपस में भेदभाव रोकने के लिए है, उसे उन्होंने ‘अननेसेसरी और इरेशनल’ बताया.”

अब छात्र संगठन आगे की लड़ाई की तैयारी में हैं. धनंजय ने बताया कि वे दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अपील कर रहे हैं कि मामले को देखें और छात्रों को रिहा करें. “1 मार्च को हम फिर जज के पास जा रहे हैं. जो क्लॉज लगाया गया है, उसे हटाएं और छात्रों को बेल दें. हमारे वकील अभिक चिमनी और आयुष श्रीवास्तव इस पर अपील कर रहे हैं. ये पढ़ने-लिखने वाले छात्र हैं, जेल में रहने लायक नहीं.” 

जेएनयू प्रशासन ने क्या कहा?

JNU प्रशासन ने JNUSU पर ‘कैंपस में तोड़फोड़ और हिंसा’ का आरोप लगाते हुए कहा है कि संघ ने मुख्य मुद्दों को नजरअंदाज किया है. फिलहाल इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच जारी है.



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