Thursday, February 5, 2026
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IndiGo और Air India ने इस वजह से ईरानी एयर स्पेस का इस्तेमाल किया बंद, उड़ान का समय बढ़ा लागत में भी बढ़ोतरी


इंडिगो ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य परिचालन विश्वसनीयता बनाए रखना और यात्रियों को कम से कम असुवि- India TV Paisa

Photo:ANI इंडिगो ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य परिचालन विश्वसनीयता बनाए रखना और यात्रियों को कम से कम असुविधा पहुंचाना है।

भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईरानी हवाई क्षेत्र के उपयोग पर प्रतिबंध लगने से भारतीय एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया ने अपनी लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। दोनों एयरलाइंस अब यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका जाने वाली उड़ानों के लिए ईरान के ऊपर से गुजरने वाले पारंपरिक रूट की बजाय वैकल्पिक मार्ग अपना रही हैं। इन वैकल्पिक रूटों के चलते उड़ानों की अवधि में 1.5 से 3 घंटे तक की वृद्धि हो रही है, जिससे ईंधन की खपत भी काफी बढ़ गई है। इससे परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और शेड्यूल पर दबाव बढ़ा है।

इंडिगो के बदलाव

इंडिगो ने बीते बुधवार को घोषणा की कि भू-राजनीतिक परिस्थितियों, बदलते एयरस्पेस प्रतिबंधों और भारत और विदेशी हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ के कारण उसके वाइड-बॉडी Boeing 787-9 Dreamliner विमानों से संचालित लंबी दूरी के परिचालन पर असर पड़ा है।  17 फरवरी 2026 से कोपेनहेगन के लिए सभी सेवाएं निलंबित कर दी जाएंगी (यह रूट अक्टूबर में शुरू हुआ था)। इसी तरह, दिल्ली-लंदन हीथ्रो रूट पर 9 फरवरी से उड़ानों की संख्या 5 से घटाकर 4, साप्ताहिक कर दी जाएगी।  दिल्ली-मैनचेस्टर रूट पर पहले 7 फरवरी से 5 से 4 साप्ताहिक, और फिर 19 फरवरी से 3 साप्ताहिक उड़ानें रहेंगी। इंडिगो ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य परिचालन विश्वसनीयता बनाए रखना और यात्रियों को कम से कम असुविधा पहुंचाना है।

एयर इंडिया की स्थिति

एयर इंडिया ने भी ईरान में डेवलप हो रहे हालात को देखते हुए पश्चिम दिशा में जाने वाली उड़ानों (अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप सहित कनाडा के टोरंटो और वैंकूवर) के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाए हैं, जैसे इराकी हवाई क्षेत्र से होकर।  एयरलाइन के सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा सर्वोपरि है। एयर इंडिया वैश्विक विमानन सुरक्षा एजेंसियों, विशेष सुरक्षा सलाहकारों और जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर आगे और बदलाव किए जा सकते हैं। ये बदलाव यात्रियों के लिए उड़ान समय में देरी, संभावित कनेक्शन प्रभाव और अतिरिक्त ईंधन लागत का कारण बन रहे हैं, लेकिन दोनों एयरलाइंस ने स्पष्ट किया है कि यात्री और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

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