वीरेंद्र सहवाग ने इंडिया-पाकिस्तान मैचों से जुड़े किस्से साझा करते हुए कहा- उनका पहला इंटरनेशनल मैच पाकिस्तान के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें काफी कुछ सुनने को मिला था। तभी उन्होंने मन में ठान लिया था कि जब भी दोबारा पाकिस्तान के खिलाफ
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सहवाग ने बताया कि यह मौका उन्हें 2004 में मिला। जब मुल्तान टेस्ट में उन्होंने 309 रन बनाए और जो कुछ पहले सुना था, उसका जवाब बल्ले से दिया।
सहवाग ने कहा- उस मैच में जब वे 228 रन पर नॉटआउट थे, तब शोएब अख्तर के साथ उनकी बहस हो गई थी। उसी दौरान उन्होंने मैदान पर कहा था- ‘बाप बाप होता है, बेटा बेटा होता है।’ सहवाग ने बताया कि इसके बाद यह लाइन काफी फेमस हो गई। आज भी जब इंडिया-पाकिस्तान का मैच होता है तो यह किस्सा पाकिस्तान के खिलाड़ियों और फैंस के बीच जरूर दोहराया जाता है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग सोमवार को जयपुर पहुंचे। सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026 के दूसरे दिन क्रिकेट और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े किस्से बताए।

आईपीएल को लेकर सहवाग ने बताया कि इस लीग के बाद विदेशी खिलाड़ियों के नजरिये में बड़ा बदलाव आया है।

सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026 के दूसरे दिन क्रिकेट और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े किस्सों को सहवाग ने सुनाया।
टी-20 के बाद टी-10 क्रिकेट का दौर भी देखने को मिल सकता आईपीएल को लेकर क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने बताया- इस लीग के बाद विदेशी खिलाड़ियों के नजरिये में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां स्लेजिंग जैसी चीजें ज्यादा देखने को मिलती थीं, अब उनमें कमी आई है। उन्होंने बताया- भारत का समय आ चुका है। हालांकि टेस्ट और वनडे क्रिकेट हमेशा मजबूत आधार बने रहेंगे। भविष्य को लेकर उन्होंने संभावना जताई कि टी-20 के बाद टी-10 क्रिकेट का दौर भी देखने को मिल सकता है।
जेईसीसी के मुख्य हॉल में आयोजित फायरसाइड चैट के दौरान ‘नो फियर, नो लिमिट्स: लेसन्स फ्रॉम द वर्ल्ड्स मोस्ट एग्रेसिव ओपनर’ विषय पर अनुभव साझा किए। इस दौरान सहवाग ने क्रिकेट के साथ-साथ स्टार्ट-अप, निवेश, नेतृत्व, टीमवर्क और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी कई बातें शेयर की। बातचीत की शुरुआत आईपीएल के प्रभाव और क्रिकेट की बदलती संस्कृति से हुई।
जोखिम के बिना न खेल में आगे बढ़ा जा सकता है, न बिजनेस में स्टार्टअप और निवेश पर बोलते हुए वीरेंद्र सहवाग ने बताया- जोखिम लिए बिना प्रगति संभव नहीं है, लेकिन यह जोखिम नपा-तुला और समझदारी से लिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि स्मार्ट बनें, सही निवेशक चुनें और सही घोड़े पर दांव लगाएं। उनके मुताबिक स्टार्टअप संस्कृति युवाओं को जोखिम लेना और नवाचार करना सिखाती है।
टीमवर्क और नेतृत्व ही सफलता की असली कुंजी टाई ग्लोबल के कन्वीनर महावीर प्रताप शर्मा से बातचीत में वीरेंद्र सहवाग ने बताया- किसी भी टीम या संगठन की सफलता का आधार आपसी भरोसा, सहयोग और सकारात्मक नेतृत्व होता है। हर कंपनी को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आलोचना से घबराने के बजाय अपने प्रदर्शन से जवाब देना ज्यादा जरूरी है।
‘मैच में बॉस एंपायर होता है’-क्रिकेट से कार्यस्थल तक का सबक क्रिकेट करियर के किस्से साझा करते हुए वीरेंद्र सहवाग ने बताया- मैच के दौरान एंपायर बॉस होता है। अगर मुश्किल समय में आप अपने बॉस का साथ देते हैं तो जरूरत पड़ने पर वही बॉस आपकी मदद भी करता है। उन्होंने समझाया कि छोटी-छोटी रणनीतियों और सही व्यवहार से बड़ी चुनौतियों को भी जीता जा सकता है।
सहवाग ने कहा-
बॉस बॉस होता है, लेकिन कठिन समय में यदि आप अपने बॉस का साथ देते हैं, तो समय आने पर वह भी आपकी मदद करता है।

साथ ही कई क्रिकेट मैच के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि मैच के बॉस यानी एंपायर से यदि व्यवहार अच्छा होता है तो उसके कितने फायदे होते हैं।

वीरेंद्र सहवाग ने बताया- क्रिकेट के अलावा हॉकी सहित कई अन्य खेलों में खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती।
अन्य खेलों को भी चाहिए आर्थिक सुरक्षा वीरेंद्र सहवाग ने बताया- क्रिकेट के अलावा हॉकी सहित कई अन्य खेलों में खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। हर खेल में निवेशकों का आना जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों को वित्तीय स्थिरता मिल सके। उन्होंने बताया- अच्छा प्रदर्शन सराहा जाता है। खराब प्रदर्शन पर आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन हर दिन एक जैसा नहीं होता। टीम साथियों के अच्छे प्रदर्शन की भी कामना करनी चाहिए।
ओलिंपिक में ज्यादा पदक जीत सकता है भारत वीरेंद्र सहवाग ने बताया- अगर देशभर में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें सही संसाधन और मंच दिए जाएं तो भारत ओलिंपिक में ज्यादा पदक हासिल कर सकता है। भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।


