
सैम ऑल्टमैन
India AI Impact Summit: ओपनएआई के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि भारत में पूर्ण रूप से एआई लीडर बनने की सभी आवश्यक क्षमताएं मौजूद हैं। ऑल्टमैन ने देश की प्रौद्योगिकी प्रतिभा, राष्ट्रीय रणनीति और एआई की संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को इसकी बड़ी ताकत बताया। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए लिखा कि भारत घरेलू प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता और सरकार की नीतिगत पहल के जरिये एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने में आगे है।
इंडिया एआई मिशन से बढ़ेगी कंप्यूट क्षमता- सैम ऑल्टमैन
ओपनएआई के सीईओ ने भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह मिशन कंप्यूट क्षमता बढ़ाने, स्टार्टअप का समर्थन करने और स्वास्थ्य, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में बहुभाषी एआई एप्लीकेशन्स को तेजी से लागू करने के लिए बनाया गया है, ताकि एआई करोड़ों लोगों के लिए एक जरूरी माध्यम बन सके। उन्होंने भारत में एआई टूल की तेजी से स्वीकार्यता को भी सराहा और कहा कि अब देश में साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 करोड़ है, जो अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में भारत में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही ओपनएआई का मुफ्त शोध और सहयोग उपकरण ‘प्रिज्म’ इस्तेमाल करने में भारत चौथे नंबर पर है।
एआई का सही उपयोग और पहुंच समान होना चाहिए- सैम ऑल्टमैन
सैम ऑल्टमैन ने कहा, “एआई के लाभ बढ़ाने के लिए पहुंच, उपयोग और क्षमता तीनों पर ध्यान देना जरूरी है। पहुंच का मतलब है कि लोग और संस्थान एआई का पूरी तरह लाभ उठा सकें। उपयोग का मतलब है कि एआई को स्कूलों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक सेवाओं में प्रभावी रूप से लागू किया जाए और क्षमता का मतलब है कि लोगों को एआई का सही उपयोग करने की योग्यता और आत्मविश्वास दिया जाए, जिससे वे तेजी से सीख सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एआई तक पहुंच और उसका उपयोग असमान होगा, तो इसके लाभ भी असमान रहेंगे। अगर इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया तो उत्पादकता और आर्थिक लाभ केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह सकते हैं।
एआई की तीन प्राथमिकताएं जरूरी
ऑल्टमैन ने कहा कि “ओपनएआई भारत में भारत के साथ और भारत के लिए एआई विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने अपने उपकरण मुफ्त में उपलब्ध कराए हैं ताकि अधिक लोगों तक पहुंच बढ़ाई जा सके।” उन्होंने तीन प्राथमिकताएं बताईं: एआई शिक्षा का विस्तार, कंप्यूटिंग और ऊर्जा अवसंरचना का निर्माण और एआई को रोजमर्रा के कार्यों में शामिल करना। उन्होंने कहा, “अवसंरचना ही भविष्य तय करती है।” सुरक्षा पर जोर देते हुए ऑल्टमैन ने कहा, “एआई तभी सफल होगा जब लोग इस पर भरोसा करें। अगर एआई का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद नहीं होगा तो इसके लाभ सीमित रहेंगे।”
सैम ऑल्टमैन ने कहा, “हम जल्द ही भारत सरकार के साथ नई साझेदारियों की घोषणा करेंगे ताकि देश में अधिक लोगों तक एआई की पहुंच और इसके लाभ पहुंचाए जा सकें। एआई भारत के भविष्य को आकार देगा और भारत एआई के भविष्य को परिभाषित करेगा। और यह काम केवल एक लोकतंत्र ही कर सकता है।”
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