कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत मिली है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कथित मानहानिकारक प्रचार से जुड़े एक मामले को खारिज कर दिया है. यह मामला Corruption Rate Card नामक विज्ञापन से संबंधित था, जिसमें उस समय की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. यह विज्ञापन कांग्रेस के चुनाव अभियान का हिस्सा था और राहुल गांधी ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया था. इसी को लेकर भाजपा की ओर से केशवप्रसाद ने निजी शिकायत दायर की थी. शिकायत के आधार पर निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था.
समन के खिलाफ राहुल गांधी ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनील दत्त यादव की अगुवाई वाली पीठ ने की. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए निजी शिकायत और उसके आधार पर जारी समन को निरस्त कर दिया.
चुनावी प्रचार के दौरान दिए गए बयानों का मामला
यह मामला चुनावी प्रचार के दौरान दिए गए बयानों और विज्ञापनों की कानूनी सीमाओं से जुड़ा था. हाईकोर्ट के इस फैसले को राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. फिलहाल इस फैसले के बाद निचली अदालत की कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी. भाजपा की ओर से आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे, इस पर नजर रहेगी.
हाईकोर्ट में याचिका दायर
राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट या प्रचार सामग्री उन्हें व्यक्तिगत रूप से सीधे तौर पर नहीं जोड़ती. उनका तर्क था कि यह चुनावी अभियान का हिस्सा था और राजनीतिक टिप्पणी के दायरे में आता है. हाईकोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के आरोप राजनीतिक आलोचना की श्रेणी में आते हैं और इन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है. अदालत ने माना कि इस मामले में कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.
40% कमीशन वाली सरकार नारे से जुड़ा था मामला
यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के ‘40% कमीशन वाली सरकार’ नारे से जुड़ा था. इस नारे के जरिए भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे. इसी संदर्भ में ‘Corruption Rate Card’ विज्ञापन भी जारी किया गया था, जिसे लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी.


