19 मिनट पहले
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चीन ने दलाई लामा की छवि खराब करने के लिए इंटरनेट और डिजिटल प्रोपेगेंडा का सहारा लिया। चीनी सरकारी मीडिया ने अमेरिका के बदनाम अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का गलत मतलब निकालकर दलाई लामा का नाम उनसे जोड़ने की कोशिश की।
लेकिन केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने इन बातों को पूरी तरह झूठा बताया है। उन्होंने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की जारी की गई एपस्टीन फाइलों को ध्यान से जांचा।
जांच में सामने आया कि फाइलों में दलाई लामा का नाम सिर्फ किसी और के बयान या संदर्भ में आया है। दलाई लामा और एपस्टीन के बीच न तो कभी मुलाकात हुई, न पैसों का कोई लेन-देन हुआ और न ही किसी तरह की बातचीत का कोई सबूत मिला।
जब मामला बढ़ा तो दलाई लामा के दफ्तर ने साफ कहा कि दलाई लामा ने कभी जेफ्री एपस्टीन से मुलाकात नहीं की और न ही किसी को उनकी तरफ से उससे बात करने की इजाजत दी।
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गुयाना के मंत्री ने हिंदी में भाषण दिया, वीडियो वायरल:विपक्ष को चुनौती दी, बोले- मैं बिना कागज के हिंदी में बहस को तैयार

दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना की संसद में भारतीय मूल के मंत्री विकाश रामकिसून का हिंदी में दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। संसद सत्र के दौरान उन्होंने विपक्ष के उस दावे का जवाब हिंदी में दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें हिंदी नहीं आती।
विपक्षी सांसद विष्णु पांडेय ने सदन में टिप्पणी की कि विकाश रामकिसून को हिंदी का एक शब्द भी नहीं आता। इस पर रामकिसून ने स्पीकर से अनुमति ली और कहा कि वे इसी मुद्दे पर हिंदी में जवाब देना चाहते हैं।
इसके बाद उन्होंने हिंदी में बोलते हुए विपक्षी सांसद को खुली चुनौती दी। रामकिसून ने कहा, “मैं अभी इसी वक्त उन्हें चुनौती देता हूं कि किसी भी स्तर पर, किसी भी जगह पर, विषय वे तय करें और मैं बिना कागज देखे हिंदी में बहस करूंगा।” पढ़ें पूरी खबर…
बांग्लादेश चुनाव सीरीज पार्ट-3:बांग्लादेश में 35 साल तक शेख हसीना और खालिदा जिया की जंग, नाम पड़ा- बैटल्स ऑफ बेगम्स

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की 2004 में ढाका में एक जनसभा चल रही थी। हसीना भाषण खत्म कर लौट ही रही थीं, तभी हमलावरों ने उनके काफिले की ओर कई ग्रेनेड फेंके।
कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धमाकों और चीख-पुकार से गूंज उठा। सड़क खून से लाल हो गई। 24 लोग मारे गए, 500 से ज्यादा घायल हुए। शेख हसीना बाल-बाल बच गईं, लेकिन उनका बायां कान हमेशा के लिए खराब हो गया।
यह हमला बांग्लादेश की राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद शेख हसीना और खालिदा जिया के बीच जो नफरत पनपी, वह खालिदा जिया की मौत तक खत्म नहीं हुई। दोनों नेताओं की इस जंग को मीडिया ने नाम दिया- बैटल्स ऑफ द बेगम्स। पढ़ें पूरी खबर…



