Wednesday, February 11, 2026
Homeशिक्षानजर नहीं लेकिन हौसला बुलंद 100% ब्लाइंड थान्या नाथन ने रचा इतिहास,...

नजर नहीं लेकिन हौसला बुलंद 100% ब्लाइंड थान्या नाथन ने रचा इतिहास, बनीं राज्य की पहली महिला जज;जानें उनकी सफलता की कहानी


जिंदगी में सफलता पाने के लिए सिर्फ साधन ही नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है. केरल के कन्नूर जिले की रहने वाली थान्या नाथन सी. ने यह साबित कर दिखाया है. जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लगन से न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बनने का सपना पूरा किया.

कठिन परिस्थितियों में हासिल की सफलता

थान्या नाथन पूरी तरह से दृष्टिहीन हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया. उन्होंने केरल ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा 2025 पास की और दिव्यांग उम्मीदवारों की मेरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त किया. उनकी सफलता आज कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है.

खुद की मेहनत से की तैयारी

थान्या ने परीक्षा की तैयारी के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया. परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उन्होंने खुद से पढ़ाई शुरू की. लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास की.

वकालत से शुरू हुआ करियर

थान्या ने वर्ष 2024 में वकालत के क्षेत्र में कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी. उनकी लगन और समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.

न्यायालय के फैसले से मिला अवसर

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिव्यांग उम्मीदवारों को न्यायिक सेवा में अवसर देने के फैसले ने थान्या जैसे युवाओं को नई उम्मीद दी. इस फैसले से प्रेरित होकर उन्होंने परीक्षा देने का निर्णय लिया और शानदार सफलता हासिल की.

टेक्नोलॉजी बनी सहारा

थान्या का कहना है कि आधुनिक तकनीक ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए कई रास्ते आसान किए हैं. उन्होंने बताया कि स्क्रीन रीडर और वॉइस सॉफ्टवेयर जैसे उपकरणों की मदद से न्यायिक कार्य करना संभव हो जाता है.

शुरुआती पढ़ाई से लेकर एलएलबी तक शानदार प्रदर्शन

थान्या जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई विशेष विद्यालय से की. इसके बाद उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई सामान्य स्कूलों से पूरी की.स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई करने का निर्णय लिया. उन्होंने कन्नूर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की और वहां टॉप भी किया. खास बात यह रही कि वह अपने कॉलेज में दृष्टिबाधित एकमात्र छात्रा थीं.

परिवार और शिक्षकों का मिला सहयोग

थान्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को दिया है. उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और सीनियर्स के मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया.थान्या का मानना है कि सफलता पाने के लिए निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत जरूरी है.उन्होंने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवारों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता जरूर मिलती है.

यह भी पढ़ें – मुंबई मेट्रो में इंजीनियर और आईटी समेत कई पदों पर वैकेंसी, लाखों में मिलेगी सैलरी; यहां जानें पूरी डिटेल्स

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments