Wednesday, February 11, 2026
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Astronaut कैसे बनें? जानिए पढ़ाई, कोर्स, सैलरी और ISRO-NASA का पूरा रास्ता


अंतरिक्ष में जाने का सपना बचपन से ही लोगों को रोमांचित करता रहा है और यही वजह है कि Astronaut बनना आज भी युवाओं के सबसे बड़े करियर लक्ष्यों में गिना जाता है. लेकिन यह रास्ता जितना रोमांचक दिखता है, उतना ही कठिन और अनुशासन से भरा भी होता है. Astronaut बनने के लिए सिर्फ इच्छा काफी नहीं होती, बल्कि मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि, बेहतरीन शारीरिक फिटनेस और सालों की कठिन ट्रेनिंग जरूरी होती है. आइए आपको बताते हैं कि आप कैसे एक Astronaut बन सकते हैं और क्या क्वालिफिकेशन इसके लिए जरूरी होंगी.

Astronaut कैसे बनें, कौनसी करनी होती है पढ़ाई

अंतरिक्ष में जाने का सपना देखने वाले युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन Astronaut बनना सिर्फ सपना नहीं बल्कि सालों की मेहनत, सही पढ़ाई और कड़ी ट्रेनिंग का नतीजा होता है. बहुत से छात्र यह जानना चाहते हैं कि Astronaut बनने के लिए कौन-सा कोर्स करें, किन कॉलेजों से पढ़ाई करें और क्या इसके लिए कोई आधिकारिक रास्ता मौजूद है. इस खबर में हम इन्हीं सवालों के जवाब आधिकारिक सॉर्स के आधार पर दे रहे हैं.

इन लोगों को आसानी से मिल जाता है मौका

Astronaut बनने के लिए कोई अलग से “Astronaut डिग्री” नहीं होती. इसके बजाय उम्मीदवार को साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स यानी STEM बैकग्राउंड से मजबूत पढ़ाई करनी होती है. ISRO के Human Spaceflight Programme और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, इंजीनियरिंग, फिजिक्स, मैथ्स और एयरोस्पेस जैसे विषय Astronaut बनने की बुनियाद माने जाते हैं.

किन इंस्टिट्यूट्स में होती है पढ़ाई

भारत में इस दिशा में सबसे अहम संस्थान Indian Institute of Space Science and Technology (IIST), तिरुवनंतपुरम है, जो सीधे ISRO के अधीन काम करता है. IIST में Aerospace Engineering और Space Science से जुड़े कोर्स कराए जाते हैं और यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों को ISRO में काम करने के बेहतर अवसर मिलते हैं. इसके अलावा IIT बॉम्बे, IIT मद्रास, IIT कानपुर और IIT खड़गपुर में Aerospace और Mechanical Engineering के कोर्स उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल स्पेस सेक्टर में किया जाता है.

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कितनी होती है सैलरी

Astronaut की सैलरी देश, स्पेस एजेंसी और अनुभव पर निर्भर करती है. भारत में अगर Astronaut ISRO के जरिए चुना जाता है, तो शुरुआत में उसे सरकारी वेतनमान (लेवल-10 से लेवल-14) के तहत सैलरी मिलती है. शुरुआती दौर में यह सैलरी करीब 1 लाख से 1.5 लाख रुपये प्रति माह के आसपास हो सकती है. जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है और मिशन असाइन होते हैं, सैलरी के साथ मिशन अलाउंस, रिस्क अलाउंस और अन्य भत्ते जुड़ जाते हैं, जिससे कुल कमाई 2.5 लाख से 4 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है. वरिष्ठ स्तर या लंबे मिशन अनुभव वाले Astronauts की सालाना कमाई 30–40 लाख रुपये तक मानी जाती है.

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