Monday, February 9, 2026
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नेपाल का किडनी वाला गांव 'होक्शे':भारत में हर साल नेपालियों की 200 से ज्यादा किडनी बिक रहीं, दिल्ली से ऑपरेट हो रहा रैकेट




नेपाल की राजधानी काठमांडू से 40 किमी, थाना पांचखाल से मात्र 3 किमी दूर और सैन्य छावनी से सटा हुआ गांव है होक्शे। लेकिन, इसकी चर्चा पूरे नेपाल में किडनी वाले गांव के रूप में है, क्योंकि यहां के 100 से ज्यादा नौजवानों की किडनी भारत में ‘बिक’ चुकी हैं। हैरानी की बात है कि नेपाली पुलिस रैकेट के मुख्य सरगनाओं को जेल में डाल चुकी है, फिर भी रैकेट खत्म होने के बजाय सिंधुपाल चौक, काभ्रे, सिंधूली, स्यांजा और काठमांडू जिलों तक फैल गया है। अब भारतीय तस्कर इसे ऑपरेट कर रहे हैं। वे सीधे यहां अपने एजेंट्स के जरिए शिकार ढूंढ़ते हैं और उन्हें नई दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता लाकर 4 से 5 लाख रु. में किडनी का सौदा करते हैं। भास्कर टीम ने नेपाल के इन जिलों में पहुंचकर करीब 20 पीड़ितों से बात की। काठमांडू कोर्ट में दाखिल इस मामले की पहली चार्जशीट को खंगाला, तब इस अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट के तार नई दिल्ली से जुड़ते मिले। मामले की पड़ताल करने वाले नेपाल के मानव तस्करी रोकथाम ब्यूरो के प्रमुख एसएसपी कृष्णा प्रसाद पांजेनी कहते हैं कि हर साल 200 नेपालियों की भारत में किडनी के लिए तस्करी हो रही है। नेपाल में किडनी लेना-देना अपराध हैं। इसीलिए किडनी तस्करों और पी​ड़ितों की जानकारी नहीं मिल पा रही थी, ले​किन 5 अगस्त 2025 को ​सिंधुली जिले के एक पी​ड़ित की खबर स्थानीय ब्लॉगर ने डाली, जिसमें पी​ड़ित ने बताया ​कि कैसे दिल्ली ले जाकर उसकी ​किडनी निकाल ली गई। इस केस के बाद हमने इंस्पेक्टर रुद्र भट्ट के नेतृत्व में टीम भारत भेजी। तीन महीने में रैकेट का भंडाफोड़ ​किया। दो नेपाली तस्करों मास्टरमाइंड श्याम भंडारी और सूजन गिरी समेत 6 लोगों को दबोच लिया। उन्होंने कई चौंकाने वाले बयान दिए। भास्कर से बोली किडनी तस्कर- घबराने की जरूरत नहीं भास्कर ने जब ​किडनी तस्कर रुम्मन से बात की तो उसने बताया कि डोनर दिल्ली में ही मिलेगा। 25 से 30 ​दिन में सब हो जाएगा। 40 लाख कुल खर्च रहेगा। सारे काम लीगल होंगे। घबराने की जरूरत नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में दो-तीन हॉस्पिटल अपनी रेंज में हैं। कोलकाता में काम में देरी होती है। आप पैसे का इंतजाम करें, बाकी हम देख लेंगे। पहले रेकी, ​काम का बहाना, फिर 6 महीने बाद वापसी श्याम और सूजन पहले गांव की रेकी कर उन लोगों को टारगेट करते, जो परिवार से अलग हों। 25 से 40 की उम्र के हों। फिर इन्हें भारत में होटल में काम ​दिलवाने के बहाने हवाई जहाज से नई दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद ले आते। यहां नेपाली तस्कर ही उन्हें संभालता और किडनी निकालने के 6 महीने के भीतर उन्हें नेपाल वापस भेज देता। काठमांडू की चार्जशीट में नई दिल्ली-कोलकाता के अस्पतालों के नाम इस मामले की चार्जशीट पिछले साल दिसंबर में दाखिल हुई थी। इंस्पेक्टर रुद्र भट्ट के मुताबिक 38 साल का भंडारी ​सिंधुपाल चौक ​जिले का है। भंडारी और गिरी ने बयान दिए हैं कि हम दोनों दिल्ली में रहने वाले रुम्मन कासिम, अरविंद बंगाली और आनंद यादव से संपर्क में थे। अब ये तीन ही अंतरराष्ट्रीय रैकेट को भारत, नेपाल और बांग्लादेश से ऑपरेट कर रहे हैं। रुम्मन बंगाल की रहने वाली है और अब मुख्य सरगना है, जो भारत में मुख्य सरगना है। श्याम की रुम्मन-आनंद से मुलाकात 2023 में नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में हुई थी। रुम्मन यहां काम करती है। चार्जशीट में यर्थार्थ के अलावा कोलकाता के दो अस्पतालों क्वाड्रा मेडिकल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व रवींद्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट के नाम हैं। दिल्ली के तिलकनगर की लैब में सारे टेस्ट होते हैं। श्याम ने लाजपत नगर में मकान ओ18, ओ7 और जी7 को किराए पर ले रखा था। वह खुद दिल्ली के पहाड़गंज के ऋषि गेस्ट हाउस में रहता था। पी​ड़ितों को ऑपरेशन के पहले और बाद में अलग-अलग जगह रखते थे। नेपाल पुलिस के अनुसार 6 में से 5 नेपाली तस्करों की किडनी भी इसी तरह निकाली जा चुकी थी। इस केस के सभी पीड़ित दलित हैं। अकेला सूजन गिरी अब तक 25 नेपाली नागरिकों को किडनी बिकवाने के लिए भारत ला चुका है, जिसमें से 16 की किडनी बिक गई है। सबकी कीमत तय है – कुल खर्च: 35 से 40 लाख
– रेकी खर्च: 5 से 7 हजार
– बॉर्डर से नई दिल्ली: 1 से डेढ़ लाख
– 6 महीने का खर्च: 2 लाख
– किडनी देने वाले को 4-5 लाख ही मिलते थे, जबकि रैकेट चलाने वाले 25 लाख रु. तक रखते थे।



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