
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शुक्रवार को अपने आईपीओ को मंजूरी दे दी। एनएसई का ये आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस पर आधारित होगा और इसमें कोई भी नया इश्यू शामिल नहीं होगा। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का ये फैसला बाजार नियामक सेबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NoC) मिलने के कुछ ही समय बाद आया है। इसके साथ ही, एक दशक से भी ज्यादा लंबे समय के बाद एक्सचेंज के लिए अपनी लिस्टिंग योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। एक बयान के मुताबिक, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में आईपीओ प्रक्रिया को पूरा करने के लिए गठित समिति के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई।
तबलेश पांडेय करेंगे पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता
पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता गैर-स्वतंत्र निदेशक तबलेश पांडेय करेंगे। इसमें सार्वजनिक हित निदेशक श्रीनिवास इंजेती, ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी और जी शिवकुमार के साथ प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान भी शामिल होंगे। समिति को सूचीबद्धता के लिए शासन, अनुपालन और प्रक्रियात्मक अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए आईपीओ से जुड़ी अलग-अलग प्रक्रियाओं की निगरानी और सुविधा का जिम्मा सौंपा गया है। एनएसई ने एक बयान में कहा, ”कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ओएफएस के माध्यम से आईपीओ लाने और कंपनी के 1 रुपये की फेस वैल्यू वाले इक्विटी शेयरों की लिस्टिंग पर विचार किया गया और इसे मंजूरी दी गई।”
2016 से ही फंसा पड़ा था पेंच
देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एक्सचेंज एनएसई की लिस्टिंग होने की योजना साल 2016 से ही पेंडिंग है। उसी साल एनएसई ने मौजूदा शेयरधारकों द्वारा लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बिक्री पेशकश (OFS) के जरिये आईपीओ लाने के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। हालांकि, सेबी ने संचालन खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़े नियामकीय चिंताओं के चलते इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद से एनएसई ने कई बार नियामक से सूचीबद्ध होने की अनुमति मांगी, लेकिन अब तक उसे हरी झंडी नहीं मिल पाई थी। हाल ही में सेबी ने इस मामले में अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया है जिसके बाद उसके आईपीओ आने का रास्ता साफ दिख रहा है।


