Wednesday, February 4, 2026
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US Navy Carrier Near Iranian Drone; US Shoots Down Drone in Arabian Sea


दुबई7 घंटे पहले

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USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है। - Dainik Bhaskar

USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है।

अमेरिका ने मंगलवार को अरब सागर में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान का शाहेद-139 ड्रोन अमेरिकी नौसेना के ‘USS अब्राहम लिंकन’ एयरक्राफ्ट कैरियर (वॉरशिप) के पास पहुंच गया था।

USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बयान के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने आत्मरक्षा में F-35C फाइटर जेट से ईरानी ड्रोन को मार गिराया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की तरफ से एक ‘आक्रामक’ व्यवहार बताया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ड्रोन किस मकसद से तैनात किया गया था। अमेरिका के अनुसार, ड्रोन ने कमांड की तरफ से किये गए नॉन-लेथल डिफ्यूजन कोशिशों के बावजूद अपनी दिशा नहीं बदली।

इसके चलते फोर्स का इस्तेमाल किया गया। इस घटना पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अमेरिका से तनाव के चलते ईरान ने 30 जनवरी को कहा था कि उसने जमीन और समुद्र से हमला करने वाले 1000 ड्रोन तैयार कर लिए हैं।

अमेरिका-ईरान में तनाव के बीच 6 फरवरी को अहम बैठक

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और वार्ताओं को फिर से शुरू करने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के बीच शुक्रवार को तुर्किये में महत्वपूर्ण बैठक होने की उम्मीद है।

कई क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनेर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस बैठक में शामिल होंगे।

साथ ही तुर्किये, कतर और मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों के भी मौजूद रहने की संभावना है। कुछ सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और पाकिस्तान जैसे अन्य देशों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग ले सकते हैं।

ईरान पर हमले की धमकी दे चुके हैं ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 28 जनवरी को ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने को कहा था। ऐसा न करने पर उन्होंने चेतावनी दी थी कि ईरान पर अगला हमला पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होगा।

ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी जहाजों का एक बड़ा बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है और अगर समझौता नहीं हुआ तो बुरे हालात हो सकते हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि सेना राष्ट्रपति के किसी भी सैन्य आदेश के लिए तैयार है।

पिछले महीने ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी। ट्रम्प ने तब भी हस्तक्षेप की धमकी दी थी। वे ईरान में शासन परिवर्तन की बात भी कर चुके हैं। ईरान के नेता धमकियों के बीच बातचीत से इनकार कर रहे थे।

हालांकि, अब वे बात करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। इधर, ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि उनका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा के लिए है, हथियारों के लिए नहीं। वे अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं।

अमेरिकी विध्वंसक पोत USS डेलबर्ट डी ब्लैक इजराइल के दक्षिणी बंदरगाह एलाट पर पहुंचा। (तस्वीर- इजराइल टाइम्स)

अमेरिकी विध्वंसक पोत USS डेलबर्ट डी ब्लैक इजराइल के दक्षिणी बंदरगाह एलाट पर पहुंचा। (तस्वीर- इजराइल टाइम्स)

ट्रम्प की धमकी पर ईरान बोला- हमारे 1000 ड्रोन तैयार

ट्रम्प की धमकी के बीच ईरान ने 30 जनवरी को दावा किया उसने जमीन और समुद्र से हमला करने वाले 1000 ड्रोन तैयार कर लिए हैं। ईरान की सेना ने दावा किया है अगर अमेरिका हमला करता है तो उसके ड्रोन और मिसाइलों को नेटवर्क इन हमलों को नाकाम कर सकता है।

ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने कहा कि पिछले साल जून में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए 12 दिन के संघर्ष के बाद सेना ने अपनी सैन्य रणनीति बदली है। इसके तहत बड़ी संख्या में ड्रोन तैयार किए गए हैं। हातामी के मुताबिक, ये ड्रोन जमीन और समुद्र दोनों जगहों से ऑपरेट किए जा सकते हैं।

इसके अलावा ईरान के पास पहले से ही बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं। ईरान ने कहा है कि वह जून, 2025 की तरह कतर के अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में अपने ड्रोनवाहक पोत शाहिद बाघेरी को समुद्र में तैनात किया है।

तस्वीर ईरान के ड्रोनवाहक पोत शाहिद बाघेरी की है। (फाइल फोटो)

तस्वीर ईरान के ड्रोनवाहक पोत शाहिद बाघेरी की है। (फाइल फोटो)

ईरानी सेना को EU ने आतंकी संगठन घोषित किया

यूरोपियन यूनियन (EU) ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह फैसला विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई के चलते लिया गया है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडरों समेत 15 अधिकारियों और 6 संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करने वाली संस्थाएं भी हैं। यूरोप में इनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी और उनकी यात्रा पर रोक लगेगी।

EU की राजनयिक काजा कलास ने कहा कि दमन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि IRGC को अब अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों के बराबर माना जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका पहले ही IRGC को आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं। हालांकि ब्रिटेन ने अब तक इसे अपनी आतंकी सूची में शामिल नहीं किया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने EU के इस फैसले को ‘दिखावटी कदम’ और ‘बड़ी रणनीतिक गलती’ बताया है। उनका कहना है कि यूरोप हालात संभालने के बजाय तनाव बढ़ा रहा है।

IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य ताकत मानी जाती है। इसकी स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी। इसके पास करीब 1.90 लाख सक्रिय सैनिक हैं।

IRGC की कमान सीधे सुप्रीम लीडर खामेनेई के हाथ में होती है।

IRGC की कमान सीधे सुप्रीम लीडर खामेनेई के हाथ में होती है।

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ाई

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करते हुए अरब सागर और लाल सागर में विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन, USS थियोडोर रूजवेल्ट और कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए हैं।

साथ ही कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से वायुसेना की सक्रियता बढ़ी है। अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है।

ईरान के खिलाफ पहले कार्यकाल से आक्रामक रहे ट्रम्प

ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते संयुक्त व्यापक कार्य योजना ( JCPOA) से अमेरिका को पूरी तरह बाहर निकाल लिया था।

यह समझौता ओबामा प्रशासन के समय में जुलाई 2015 में हुआ था, जिसमें ईरान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और यूरोपीय संघ शामिल थे। समझौते के तहत ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर कई सख्त सीमाएं लगाई थीं, जैसे:

  • यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित रखना (बम बनाने के लिए 90% से ज्यादा चाहिए)।
  • संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक बहुत कम रखना।
  • सेंट्रीफ्यूज मशीनों की संख्या सीमित करना।
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को निरीक्षण की पूरी अनुमति देना।

मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात

मिडिल ईस्ट (CENTCOM) में अभी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत है। मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

फिलहाल मिडिल ईस्ट में करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं।

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ये खबर भी पढ़ें…

ट्रम्प बोले- दूसरा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा:नए समझौते पर सहमति का दबाव बनाया; एक जंगी बेड़ा पहले ही पहुंच चुका है

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ शिकंजा और कसने की तैयारी में है। अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है।

मंगलवार को दिए एक भाषण में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इसकी उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान को नए समझौते पर सहमत किया जा सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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