वॉशिंगटन डीसी2 घंटे पहले
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चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार की पोल खोलने चीनी वाले नागरिक को अमेरिका में शरण मिल गई है। जज ने कहा कि अगर गुआन को चीन वापस भेजा गया तो उन्हें जान का खतरा हो सकता है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुुसार, गुआन हेंग ने शिनजियांग इलाके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को उजागर किया था। उसने 2020 में हिरासत केंद्रों की छुपकर फिल्म बनाई थी। गुआन 2021 में गैरकानूनी तरीके से अमेरिका पहुंचा था।
अगस्त 2025 में उसे हिरासत में ले लिया गया। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि शिनजियांग में दस लाख से ज्यादा उइगर मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जबरदस्ती बंदी बनाकर रखा गया है।
चीन में उइगर मुसलमान अपने अस्तित्व के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। चीनी सरकार ने 2014 से सरकारी नौकरी करने वाले उइगर मुसलमानों के सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने और दाढ़ी रखने पर पाबंदी लगाई हुई है।

चीनी नागरिक गुआन हेंग फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं।
अमेरिका पहुंचने से पहले वीडियो जारी किया था
गुआन ने शिनजियांग इलाके के हिरासत केंद्रों की वीडियो फुटेज ली और पब्लिश करने के लिए चीन छोड़ दिया। गुआन ने अमेरिका पहुंचने से कुछ दिन पहले वीडियो जारी किया था।
उन्होंने ज्यादातर वीडियो यूट्यूब पर जारी किए, जिसके बाद चीन में पुलिस ने उनके पिता से तीन बार पूछताछ की और उनके बारे में जानकारी मांगी।
गुआन 2021 में हांगकांग, इक्वाडोर, बहामास होते हुए अवैध तरीके ले नाव से फ्लोरिडा पहुंचे थे। उन्होंने कोर्ट में कहा कि वे जानते थे कि चीन में रहते हुए ये फुटेज जारी करना सुरक्षित नहीं होगा।
बुधवार की सुनवाई में जज ने पूछा कि “क्या उसने शरण पाने के लिए हिरासत केंद्रों की फिल्म बनाई और अमेरिका पहुंचने से पहले वीडियो उसे जारी किया”
गुआन अमेरिका के सुधार केंद्र से वीडियों लिंक के जरिए सुनवाई में शामिल हुआ था। जज के सवाल पर उसने जवाब दिया कि ऐसा नहीं था। उसने कहा कि “उसे सताए जा रहे उइगरों से हमदर्दी थी।”

चीनी नागरिक गुआन हेंग ने 2020 में हिरासत केंद्रों की छुपकर वीडियो बनाई थी।
गुआन के वकील बोले- शरण देना अमेरिका की नैतिक जिम्मेदारी
अमेरिका पहुंचने के बाद गुआन ने शरण के लिए आवेदन किया। 2021 से 2025 तक के बीच वे अमेरिका में ही रह रहे थे, उन्हें वर्क परमिट मिल गई थी। वे न्यूयॉर्क राज्य में बस गए। वहां उन्होंने दो नौकरियां कीं और सामान्य जीवन जी रहे थे।
अगस्त में ट्रम्प प्रशासन की बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान के तहत उन्हें हिरासत में ले लिया गया। शुरुआत में अमेरिकी विभाग ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी उन्हें युगांडा भेजने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दिसंबर में अलग मामला होने के कारण प्लान टाल दिया गया।
न्यूयॉर्क के नेपानोच में न्यायाधीश चार्ल्स ओसलैंडर ने सुनवाई में गुआन को विश्वसनीय गवाह बताया और कहा कि उन्होंने शरण के लिए कानूनी योग्यता साबित कर दी है। गुआन के वकील चेन चुआंगचुआंग ने कहा कि यह मामला शरण व्यवस्था है और अमेरिका का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह ऐसे लोगों की रक्षा करें।
हालांकि, फैसले के बाद गुआन को तुरंत रिहा नहीं किया गया। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के पास 30 दिनों के अंदर अपील करने का समय है।

अमेरिका में लोग चीनी नागरिक गुआन का समर्थन कर रहे हैं और उसे शरण देने की मांग कर रहे हैं।
दावा- चीन के कैंप से भागने वालों को गोली मारने का आदेश
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में कई पुलिस फाइलें मिली थीं। इनमें कैंपों के इस्तेमाल की डिटेल थी। इनमें हथियारबंद अधिकारियों का रूटीन बताया गया था।
उन्हें भागने की कोशिश करने वालों के लिए गोली मारने तक का अधिकार दिया गया था। कैंपों से भागने वाले लोगों ने शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा की रिपोर्ट दी है। महिलाओं ने सामूहिक बलात्कार के आरोप भी लगाए हैं।
खुद को चीनी नहीं मानते उइगर मुसलमान
उइगर एक तुर्क जातीय समूह है जो मुख्य रूप से शिंजियांग में रहता है। शिंजियांग की सीमा मंगोलिया और रूस सहित 8 देशों के साथ मिलती है। इस इलाके में मुस्लिम धर्म को मानने वाली उइगर जाति का काफी लंबे समय बीजिंग के साथ एक विवादास्पद संबंध रहा है।
शिन्जियान प्रांत में रहने वाले उइगर मुसलमान खुद को चीनी नहीं मानते। वे तुर्किश भाषा बोलते हैं और खुद को तुर्की मूल का मानते हैं। इस क्षेत्र में उइगर और चीनी सुरक्षा बलों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हुई हैं। कम्युनिस्ट सरकार की कठोर नीति के कारण हजारों उइगर भागकर दूसरे देशों में शरण लिए हुए हैं।
कई रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकारी नौकरी करने वाले उइगरों को पांच वक्त की नमाज पढ़ने या रामजान में रोजा रखने पर सजा मिल सकती है, नौकरी जा सकती है।
उइगर महिलाओं के बुर्का पहनने की भी मनाही है। चीन सरकार ने 2008 में दाढ़ी रखना बैन किया था। उइगर महिला पर्दा करके पेट्रोल स्टेशन, बैंक और हॉस्पिटल नहीं जा सकतीं। वह सरकारी नौकरी भी नहीं कर सकतीं।

चीन में उइगर मुसलमान जो सरकारी जगहों पर काम करते हैं वह लंबी दाढ़ी नहीं रख सकते।
चीन पर उइगर मुसलमानों के नरसंहार के आरोप
चीन पर उइगर मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के गंभीर आरोप लगते हैं। ये आरोप 2014 से तेज हुए हैं, खासकर 2017 के बाद जब बड़े पैमाने पर सैंटर बनाए गए।
मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई देशों की रिपोर्टों में ये बातें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ये आरोप सबूतों पर आधारित हैं, लेकिन चीन सरकार इनसे पूरी तरह इनकार करती है और कहती है कि ये कदम आतंकवाद रोकने के लिए हैं।

चीन में उइगर मुसलमानों और अल्पसंख्यकों लंबे समय से अपने हक की मांग कर रहे हैं।
मुख्य आरोप क्या हैं
- बड़े पैमाने पर हिरासत: 2017 से 10 लाख से ज्यादा उइगरों और अन्य मुसलमानों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के कैंप में बंद किया गया। ये कैंप अब कम हो गए हैं, लेकिन कई लोग अब जेलों में हैं या मजबूरन काम कर रहे हैं।
- यातना और दुर्व्यवहार: रिपोर्टों में यातना, यौन हिंसा, जबरन राजनीतिक शिक्षा और परिवारों से अलग करने की बातें हैं।
- जबरन मजदूरी: उइगरों को पॉवर्टी एलिविएशन प्रोग्राम के नाम पर जबरन फैक्टरियों या अन्य जगहों पर काम करने के लिए भेजा जाता है। जनवरी 2026 में UN विशेषज्ञों ने कहा कि ये पूरे चीन में फैला हुआ है, जो मानवता के खिलाफ अपराध है।
- जन्म नियंत्रण और जबरन नसबंदी: उइगर महिलाओं पर जबरन गर्भपात, नसबंदी और जन्म दर कम करने की नीतियां लागू की गईं, जिससे उइगर आबादी में भारी गिरावट आई।
- सांस्कृतिक मिटाना: मस्जिदों को तोड़ना, इस्लामी प्रथाओं पर रोक, उइगर भाषा और संस्कृति को दबाना।


